नयी दिल्ली, 04 अगस्त (वार्ता) विभिन्न कारणों से जेन जेड और जेन अल्फा (बच्चे और युवा वर्ग) पर छिड़ी बहसों के बीच यह इंदिरा गांधी कला केंद्र में आयोजित ‘ सविता प्रभा सांस्कृतिक महोत्सव ‘ में नन्हे और युवा कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। देश की प्रतिष्ठित संगीत शिक्षण संस्था प्रयाग संगीत समिति के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक समारोह में कथक नृत्य की साधना करने वाले इन आयुवर्ग के सौ से अधिक साधकों ने अपनी साधना, अनुशासन और उत्कृष्ट कला-प्रदर्शन से दर्शाया कि जेन जेड और जेन अल्फा न केवल आधुनिक तकनीक से जुड़ी है, बल्कि संस्कृति और परंपराओं की मजबूत संवाहक भी है।
श्री कृष्ण प्रभा कला केंद्र, कथक केंद्र नोएडा तथा सविता प्रभा प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने कथक की पारंपरिक बंदिशों, भाव, ताल और लय की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर प्रख्यात कथक गुरु डॉ. विष्णुप्रिया पांडेय द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘कल्पतरु’ का लोकार्पण भी किया गया। इसके साथ ही कथक एवं शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों और कलाकारों को सम्मानित किया गया। डॉ. पांडेय ने कहा कि प्रयाग संगीत समिति का शताब्दी वर्ष भारतीय संगीत और नृत्य की गौरवशाली परंपरा का उत्सव है। समारोह में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी आनंद सौरभ, टेडेक्स के वक्ता अमित दीक्षित, सुजीत पांडेय, राजकिशोर सिंह, संजीव कुमार सिंह, रुचि मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

