सतना: कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर चल रही मूंग की खरीदी अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। हालांकि, सरकार द्वारा तय किए गए खरीदी के अनुमान की तुलना में अब तक महज 40 प्रतिशत ही मूंग की आवक हो सकी है। मंडी में सरकारी लक्ष्य पूरा न होने की सबसे बड़ी वजह खरीदी के कड़े नियम और प्रशासनिक फैसलों में हुई देरी को माना जा रहा है।
शुरुआत में शासन द्वारा 1 एकड़ में सिर्फ 80 किलोग्राम मूंग की खरीदी का ही नियम तय किया गया था। इस सीमित सीमा के कारण किसान अपनी उपज का एक छोटा हिस्सा ही समर्थन मूल्य पर बेच पा रहे थे और बाकी बची हुई फसल को उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों को बेचना पड़ रहा था।
किसानों की लगातार मांग और विरोध के बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए इस सीमा को बढ़ाकर ढाई क्विंटल (250 किग्रा) प्रति एकड़ कर दिया। लेकिन जब तक यह राहत भरा आदेश आया, तब तक कई किसान अपनी फसल बेच चुके थे। प्रशासनिक देरी के चलते किसानों को अपनी मेहनत की कमाई का उचित मूल्य नहीं मिल सका।
सरकारी दर और बाजार भाव में बड़ा अंतर
मूंग के सरकारी समर्थन मूल्य और निजी बाजार की दरों में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिल रहा है जिसमें सरकारी समर्थन मूल्य में खरीदी 8768 रुपए प्रति कुंटल की जा रही है। वही निजी व्यापारियों की खरीदी दर ₹6,500 – ₹7,000 रुपए ही है। समर्थन मूल्य और बाजार भाव में प्रति क्विंटल लगभग ₹1,700 से ₹2,200 तक का भारी अंतर है। देर से आए फैसले के कारण किसानों को प्रति क्विंटल हजारों रुपये का सीधा घाटा सहकर अपनी उपज व्यापारियों के हाथों सौंपनी पड़ी।
