सतना : जिले में हाल के दिनों में कुएँ में उतरने के दौरान दम घुटने से हुई मौतों ने समूचे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है. ग्रामीण इलाकों में एक के बाद एक हुए इन दर्दनाक हादसों के बाद आम लोगों के बीच गहरी चिंता और दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है. कुएँ की गहराई में छिपे अदृश्य खतरे से अनजान होकर उतरने वाले लोग पल भर में काल के गाल में समा रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवारों में मातम पसरा हुआ है.
इन हृदयविदारक घटनाओं के बाद तरह-तरह की बातें सामने आ रही है जानकारों का मानना है कि कोविड के बाद शरीर की अपनी प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो गई है. सामान्य परिस्थितियों में सांस लेने के दौरान जितनी आक्सीजन फेफड़े में जानी चाहिये उतनी नही पहुच पाती है. ज्यादातर लोगों को सामान्य से अधिक मेहनत का काम करने पर सांस फूलने की दिक्कत का सामना करना पड़ता है. ऐसी परिस्थिति में गहराई और उचाई में जाने पर आक्सीजन की कमी से दमघुटने लगता है. जानकर इस बात से सहमत हैं कि कुएं के निचले स्तर पर मौजूद गैस का मुकाबला जब फेफड़ा नही कर पाता तो सांस टूट स्वाभाविक है.
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से बंद पड़े या गहरे कुओं में अक्सर जहरीली गैसें एकत्र हो जाती हैं. ऐसे में बिना किसी वैज्ञानिक जांच या सुरक्षा इंतज़ाम के नीचे उतरना सीधे तौर पर जान जोखिम में डालना है. कोविड 19 के बाद लोगो के फेफड़ों में काफ़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा लोगो को चलने,ऊचाई पर चढ़ने और गहराई में जाते ही सांस लेने में तकलीफ़ होने लगती है जिसके कारण यह घटनाए और भयावह हो जाती है.
जानकारों ने यह भी बताया कि कोविड के इलाज के लिए कोई निर्धारित प्रोटोकॉल नही था.ऐसी स्थिति में उस समय जो इलाज का तरीका सामने आया लोगो की जान बचाने के लिए उपयोग किया गया.अब उसके कई तरह के साइड इफेक्ट्स हो रहे हैं.जिसका विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए पर उस पर भी ज्यादा काम नही हो रहा है. आमतौर जिन लोगो की दिनचर्या नियमित नही होती पैदल चलना,व्यायाम करना और अन्य शरीर को स्वस्थ्य रखने की गतिविधिया नही की जाती उनके सामने इस प्रकार की दिक्कत ज्यादा आती है. लोगो
कोविड से फेफड़ों की क्षमता घटी, अचानक ऑक्सीजन कम होना जानलेवा: डॉ. अनूप
गहराई में जाने से सांस लेने में दिक़्क़त होती है। कोविड-19 से अगर कोई ग्रसित था, तो उसका फेफड़ा उतना नहीं फूल पाता जितना एक स्वस्थ व्यक्ति का फूलता है.फेफड़ों की घटती कैपेसिटी के कारण ही कुएँ या बंद जगहों में ऑक्सीजन की अचानक कमी से अप्रिय घटनाएँ हो रही हैं.गहराई या ऊंचाई में जाने से पहले फेफड़ों की जाँच ज़रूर करा लें.
डॉ.अनूप सिंह, चेस्ट स्पेशलिस्ट
कमज़ोर फेफड़ों पर अचानक दबाव से आता है साइलेंट कार्डियक अरेस्ट: डॉ अमरेन्द्र
जब कमजोर या कोविड से प्रभावित फेफड़े पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं खींच पाते, तो दिल पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ता है.कुएँ के अंदर ऑक्सीजन की कमी और ज़हरीली गैसों के बीच फेफड़ा न फूलने से व्यक्ति को चंद सेकेंड में ‘साइलेंट कार्डियक अरेस्ट’ आ जाता है, जिससे संभलने का मौका भी नहीं मिलता.
डॉ. अमरेंद्र कुमार शुक्ला
डीएम (पल्मोनोलॉजिस्ट)
कोविड-19 के बाद कई लोगों के फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है, जिससे गहराई में जाते ही या भारी शारीरिक श्रम करते समय अचानक सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है.मेरी सख्त सलाह है कि बिना प्रॉपर ऑक्सीजन सपोर्ट, मास्क और सुरक्षा जांच के किसी भी बंद या गहरे कुएँ में न उतरें
डॉ मुकेश तिवारी
चेस्ट स्पेशलिस्ट
