तेहरान, 02 अगस्त (वार्ता) ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद मजीद इब्न अल-रजा ने रविवार को कहा कि उनका देश विरोधियों से मिलने वाली हर धमकी को ‘वास्तविक और गंभीर’ मानता है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को स्थगित करने की घोषणा के बावजूद देश हाई अलर्ट पर रहेगा।
श्री अल-रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान धमकियों को सिर्फ मनोवैज्ञानिक युद्ध मानकर खारिज नहीं करेगा। उन्होंने लिखा, “हम न तो हैरान होंगे और न ही निष्क्रिय बैठेंगे। हम अपनी तैयारियों को बढ़ाने, अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए इन धमकियों को आधार बनाते हैं।”
मंत्री की यह टिप्पणी श्री ट्रंप द्वारा ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए उस दावे के बाद आई है, जिसमें श्री ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ‘ईरान के खिलाफ हमले के लिए पूरी तरह तैयार था’, लेकिन ईरान और अन्य पश्चिमी एशियाई देशों के अनुरोध के बाद सैन्य कार्रवाई को रोकने पर सहमत हो गया है।
श्री ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौते में ‘होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और पूरी तरह से खोलना तथा ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना’ शामिल होगा।
हालांकि, ईरान ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वह होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है।
इजरायल के ‘चैनल 12’ के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और कतर के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत जहाज फारस की खाड़ी में ईरान के नियंत्रण वाले समुद्री क्षेत्र से प्रवेश करेंगे और ओमान के समुद्री क्षेत्र से बाहर निकलेंगे।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने बातचीत में शामिल ईरानी टीम के करीबी एक सूत्र के हवाले से इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है।
फार्स ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से यह भी कहा कि जब तक अमेरिका की ‘शत्रुतापूर्ण और दुर्भावनापूर्ण हरकतें’ जारी रहेंगी, तब तक होर्मुज बंद रहेगा। सूत्र ने स्पष्ट किया कि जहाजों को केवल ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों से और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (आईआरजीसी) की नौसेना के समन्वय व अनुमति से ही गुजरने दिया जाएगा। सूत्र ने कहा कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर ईरान की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
गौरतलब है कि फरवरी के अंत में ईरानी क्षेत्र पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर पाबंदियां सख्त कर दी थीं और दोनों देशों से जुड़े जहाजों की आवाजाही को सीमित कर दिया था।
अमेरिका का कहना है कि ईरानी ठिकानों पर उसके सैन्य हमलों का मकसद खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों के लिए ईरान के खतरे को कम करना है, जबकि ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमलों से जवाब दिया है।
