
भोपाल। राजधानी में सड़क हादसों को रोकने के लिए भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने नई रणनीति अपनाई है. अब किसी स्थान पर लगातार दुर्घटनाएं होने के बाद उसे ब्लैक स्पॉट घोषित करने का इंतजार नहीं किया जाएगा. इसके बजाय ऐसे स्थानों की पहले से पहचान कर उन्हें रेड स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जा रहा है, जहां सड़क की बनावट, इंजीनियरिंग खामियां, दृश्यता की कमी, गलत कट, तीखे मोड़ या अत्यधिक यातायात के कारण भविष्य में गंभीर हादसों की आशंका बनी रहती है. ट्रैफिक पुलिस ने शहर के 36 थाना क्षेत्रों में 46 संभावित दुर्घटना स्थलों की पहचान की है. इन स्थानों की सूची संबंधित निर्माण एजेंसियों, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और अन्य विभागों को भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक सुधार कर समय रहते दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सके.पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई बार दुर्घटनाएं केवल तेज रफ्तार या यातायात नियमों के उल्लंघन से नहीं होतीं, बल्कि सड़क की खराब डिजाइन, अव्यवस्थित चौराहे, अपर्याप्त संकेतक, खराब रोशनी, गलत यू-टर्न, डिवाइडर की कमी और दृश्यता जैसी इंजीनियरिंग खामियां भी बड़े हादसों का कारण बनती हैं। ऐसे स्थानों पर चालक के पास दुर्घटना से बचने का अवसर बेहद कम रह जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने शहर के उच्च जोखिम मार्ग, अधिक यातायात वाले कॉरिडोर और संवेदनशील चौराहों का विस्तृत सर्वे कराया है. सर्वे के आधार पर सड़क चौड़ीकरण, संकेतक लगाने, स्ट्रीट लाइट सुधारने, डिवाइडर बनाने, स्पीड कंट्रोल उपाय लागू करने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए संबंधित विभागों को प्रस्ताव भेजे जाएंगे.
चार वर्षों के आंकड़ों का किया अध्ययन
रेड स्पॉट चिन्हित करने के लिए पुलिस ने पिछले चार वर्षों के सड़क हादसों के रिकॉर्ड, यातायात का दबाव, सड़क की संरचना, दुर्घटनाओं के कारण और मौके के निरीक्षण का विस्तृत विश्लेषण किया. जिन स्थानों पर भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका अधिक पाई गई, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सूची में शामिल किया गया.
शहर में यह प्रमुख रेड स्पॉट
बेस्ट प्राइस तिराहा, तरुण पुष्कर तिराहा, साक्षी ढाबा तिराहा, बावडिय़ा चौराहा, भदभदा चौराहा, माता मंदिर चौराहा, महात्मा गांधी चौराहा, नीलबड़ तिराहा, मैनिट चौराहा, अंकुर स्कूल तिराहा इसके अलावा अन्य थाना क्षेत्रों के कई संवेदनशील स्थानों को भी सूची में शामिल किया गया है, जहां जल्द सुधार कार्य कराने की योजना है.
लक्ष्य: हादसों से पहले रोकथाम
ट्रैफिक पुलिस का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल चालकों पर कार्रवाई से सुनिश्चित नहीं की जा सकती. यदि सड़क की भौतिक संरचना और यातायात व्यवस्था में समय रहते सुधार किए जाएं तो बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है. इसी सोच के तहत रेड स्पॉट की अवधारणा लागू की गई है, ताकि हादसे होने से पहले ही जोखिम वाले स्थानों को सुरक्षित बनाया जा सके.
इनका कहना…
जिन स्थानों पर सड़क की बनावट, डिजाइन या यातायात व्यवस्था के कारण दुर्घटनाओं की आशंका अधिक है, उन्हें रेड स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है. इन स्थानों की जानकारी संबंधित निर्माण एजेंसियों को भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक सुधार कार्य कर भविष्य में होने वाले हादसों को रोका जा सके.
– बसंत कौल, डीसीपी (प्रभारी), यातायात पुलिस
