नयी दिल्ली, 31 जुलाई (वार्ता) देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पश्चिम एशिया संकट के कारण 3,274 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा हुआ।
कंपनी के निदेशकमंडल ने शुक्रवार को वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी। घाटे की मुख्य वजह पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी रही। तिमाही के दौरान कच्चे माल की कंपनी की लागत 76 प्रतिशत बढ़कर 1,71,136 करोड़ रुपये हो गयी। यह पिछले साल 96,661 करोड़ रुपये थी।
सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करने के कारण इस मद में कंपनी का खर्च एक साल पहले के 25,637 करोड़ रुपये से घटकर 13,536 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, तैयार उत्पादों के दाम बढ़ने से उसे 20,925 करोड़ रुपये का फायदा हुआ।
तिमाही के दौरान कंपनी का कुल व्यय 2,79,631 करोड़ रुपये रहा जबकि उसका राजस्व 2,76,357 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस प्रकार उसे 3,274 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा हुआ।
मौजूदा कर और लंबित कर के भुगतान में छूट से कंपनी को 613 करोड़ रुपये की बचत हुई जिससे शुद्ध घाटा 2,661 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 5,689 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।
इंडियन ऑयल ने बताया है कि पहली तिमाही में पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार में उसे 2,873 करोड़ रुपये का कर पूर्व नुकसान उठाना पड़ा है। एक साल पहले इस कारोबार में उसे 9,138 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ हुआ था। वहीं, गैस कारोबार में उसका मुनाफा एक साल पहले के 50 करोड़ रुपये से बढ़कर 526 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पेट्रो-रसायन उत्पादों में उसने 217 करोड़ का लाभ कमाया जबकि एक साल पहले उसे एक करोड़ का घाटा हुआ था।
