भोपाल। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) के एफटीएल और 50 मीटर बफर जोन में बचे 72 अतिक्रमणों को तीन सप्ताह के भीतर हटाने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित एसडीएम और तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। साथ ही कलियासोत और केरवा जलाशय का वैज्ञानिक सीमांकन पूरा करने और उसकी रिपोर्ट भी निर्धारित समय में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, कोलार रोड स्थित अकबरपुर बाघ भ्रमण क्षेत्र में पहाड़ी कटान, अवैध खुदाई और पेड़ों की कटाई के मामले में भी NGT ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश शासन, भोपाल कलेक्टर, नगर निगम, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि यह क्षेत्र बाघों, हिरण, मोर और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। ऐसे में अवैध खुदाई और भारी मशीनों का इस्तेमाल पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
टीटी नगर एसडीएम के मुताबिक कई अतिक्रमण पहले ही हटाए जा चुके हैं। हालांकि, पुलिस बल की कमी और कुछ मामलों में हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण कार्रवाई में देरी हुई है। प्रशासन ने बारिश के बाद शेष अतिक्रमण हटाने के लिए समय मांगा है। वहीं, नगर निगम भोपाल के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार ने बताया कि हाई कोर्ट से जुड़े मामलों में जल्द अधिकारी की तैनाती की जाएगी, जिसके बाद नगर निगम अदालत में अपना पक्ष रखेगा और आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन NGT के निर्देशों का पालन तय समय-सीमा में कर पाता है या नहीं। पर्यावरण संरक्षण को लेकर NGT की सख्ती ने साफ कर दिया है कि वेटलैंड, जंगल और वन्यजीवों से जुड़े मामलों में अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नवभारत की ओर से दीपक तिवारी और मानसी झा की रिपोर्ट
