
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि यह मान लेना गलत है कि प्रधानमंत्री या चयन समिति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जाकर नियुक्तियां करेगी।
सरकार ने अदालत में दलील दी कि मौजूदा व्यवस्था संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुरूप है और पूरी तरह संवैधानिक है। दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई तय की। यह मामला देश की चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
