
इंदौर. बहुचर्चित रमेश साहू हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों में से चार को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया. अदालत ने माना कि इन चारों के खिलाफ अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका. वहीं, मामले में तीन अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार मिश्रा की अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया. अदालत ने पाया कि चार आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य दोष सिद्ध करने की स्थिति में नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया. दोषमुक्त हुए आरोपी कमल की ओर से अधिवक्ता अपूर्व जैन ने पैरवी की. उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि मामले की विवेचना में कई खामियां रहीं और अभियोजन पक्ष चारों आरोपियों की संलिप्तता को संदेह से परे साबित नहीं कर सका. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि प्रारंभिक रिपोर्ट में घटनास्थल पर केवल तीन लोगों की मौजूदगी का उल्लेख था, जबकि बाद में अन्य आरोपियों को भी मामले में शामिल किया. अदालत ने सुनवाई के दौरान इन तथ्यों और जांच से जुड़े पहलुओं पर विचार किया. फैसले के बाद अधिवक्ता अपूर्व जैन ने कहा कि न्यायालय ने सभी साक्ष्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया. अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सका, इसलिए चार आरोपियों को दोषमुक्त किया.
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना मात्र उसे दोषी साबित नहीं करता. दोषसिद्धि के लिए अभियोजन पक्ष को ठोस, विश्वसनीय और पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक होता है. साक्ष्यों के अभाव में कानून के अनुसार आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाता है.
