गुरु पूर्णिमा पर सीएम ने महर्षि सांदीपनि के चरणों में समर्पित की स्वरचित किताब

उज्जैन:गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और गुरु परंपरा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने अपनी स्वरचित पुस्तक ‘महर्षि सांदीपनि- भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ महर्षि सांदीपनि के चरणों में समर्पित की, तीन पुस्तकों का विमोचन किया तथा वेदपाठियों को श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां वितरित कीं.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि संसार का संचालन करने वाले भगवान स्वयं यहां पहुंचे और गुरुदेव से शिक्षा दीक्षा प्राप्त की यह हम सबके लिए गौरव की बात है. उस स्थल का भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अवलोकन किया, जहां भविष्य में महाकाल लोक की तर्ज पर महाकाल लोक की तर्ज पर सांदीपनि लोक का निर्माण किया जाएगा.

अद्भुत गुरुकुल
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और सनातन संस्कृति की आत्मा को समझना हो तो उसे उज्जैन के महर्षि सांदीपनि आश्रम अवश्य आना चाहिए. यही वह पावन गुरुकुल है, जहां भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने महर्षि सांदीपनि के सान्निध्य में 64 दिनों तक रहकर वेद, शास्त्र, शस्त्र, नीति और जीवन मूल्यों की शिक्षा ग्रहण की थी. इसी गुरुकुल की शिक्षा ने श्रीकृष्ण को जगद्गुरु बनने की दिशा प्रदान की और इस भूमि को सनातन संस्कृति में अद्वितीय स्थान दिलाया.

गौरवशाली परंपरा की राजधानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन केवल बाबा महाकाल की नगरी ही नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा की राजधानी भी है. सरकार इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए संकल्पित है. सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए शहर के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का समग्र विकास किया जा रहा है, जिसमें सांदीपनि लोक एक महत्वपूर्ण परियोजना होगी.

पंडित व्यास से किया था वादा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का महर्षि सांदीपनि आश्रम से वर्षों पुराना आत्मीय जुड़ाव रहा है. विधायक बनने से पहले भी वे नियमित रूप से गुरु पूर्णिमा सहित विभिन्न अवसरों पर आश्रम आते रहे हैं. आश्रम के तत्कालीन मुख्य पुजारी स्वर्गीय पंडित रूपम व्यास से उन्होंने सांदीपनि आश्रम के भव्य विकास और सांदीपनि लोक निर्माण का जो संकल्प लिया था, उसे अब मुख्यमंत्री के रूप में साकार करने की दिशा में कार्य प्रारंभ हो चुका है. गुरु पूर्णिमा पर उन्होंने प्रस्तावित सांदीपनि लोक के स्थल का निरीक्षण कर विकास की रूपरेखा पर भी चर्चा की.

पुस्तकों का विमोचन किया
पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने कुंडेश्वर महादेव और सर्वेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन किए. कार्यक्रम में ‘महर्षि गुरु सांदीपनि’, ‘महर्षि सांदीपनि- भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ तथा ‘सर्वांग’ पुस्तकों का विमोचन किया गया. संस्कृति विभाग और त्रिवेणी संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में भक्ति संगीत और ‘गुरु दत्तात्रेय की पाठशाला’ की प्रस्तुति भी हुई.

स्लेट पर पूजन हुआ
आश्रम में प्रातःकाल भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और महर्षि सांदीपनि का पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन संपन्न हुआ परंपरा के अनुसार पहली बार शिक्षा प्रारंभ करने वाले बच्चों का स्लेट पूजन भी कराया गया. गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने आश्रम पहुंचकर गुरु परंपरा को नमन किया.

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