
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी में पूछा कि जब देश में समुद्र के नीचे मेट्रो बनाई जा सकती है, तो ऐसी सडक़ें क्यों नहीं बनाई जा सकतीं जो वर्षों तक गड्ढामुक्त रहें।
दरअसल, हाईकोर्ट में सडक़ों के मौत के गड्ढो को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उठे इस सवाल ने सडक़ निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई पांच अगस्त को होगी। इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया। इंदौर के कल्याण संपत गार्डन निवासी व सेवानिवृत्त ट्रेन मैनेजर राजेन्द्र सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश की अनेक सडक़ें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव मल्होत्रा ने दलील दी कि आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद प्रदेश में टिकाऊ सडक़ें नहीं बन पा रही हैं। उन्होंने पुणे की लगभग 50 वर्ष पुरानी सडक़ का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां सडक़ें दशकों तक सुरक्षित रह सकती हैं, तो मध्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण सडक़ निर्माण क्यों नहीं हो रहा।
