नासिक, (वार्ता) पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बने ‘शलार्थ आईडी’ घोटाले में, नासिक की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार रात सोलापुर ज़िले के नातेपुते में एक फ़ार्महाउस से मुख्य मास्टरमाइंड (एक शिक्षण संस्थान के मालिक और भाजपा पदाधिकारी संजय गरुड़ ) को गिरफ़्तार किया।
फ़र्ज़ी “शलार्थ आईडी ” बनाकर सरकार को लाखों रुपयों का चूना लगाया गया है। ये आईडी महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग में भर्ती और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए ज़रूरी होती हैं।
शेंदुर्नी (जामनेर तालुका, जलगाँव ज़िला) में एक शिक्षण संस्थान के मालिक संजय गरुड़ 20 जनवरी, 2024 को शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
हालाँकि, फ़र्ज़ी शलार्थ आईडी घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड के तौर पर उनकी पहचान उजागर होने के बाद, इस मामले में और भी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
इस बीच, नासिक के सहायक पुलिस आयुक्त (अपरध) संदीप मिटके ने बताया कि गरुड़ इस मामले में छठे आरोपी हैं।
उन्होंने बताया कि इसमें 200 से ज़्यादा स्कूल शामिल हैं और नासिक, जलगाँव, धुले और नंदुरबार के 841 टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ़ सदस्यों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया है। जलगाँव ज़िला परिषद के तत्कालीन शिक्षा अधिकारी शशिकांत हिंगोनिकर को कुछ दिन पहले पुलिस ने हिरासत में लिया था।
हिंगोनिकर ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए लगभग 259 टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ़ सदस्यों को गैर-कानूनी तरीके से व्यक्तिगत मंज़ूरी दी थी। बाद में पुलिस की जांच से पता चला कि इनमें से ज़्यादातर शिक्षक संजय गरुड़ के शिक्षण संस्थान से थे।
पुलिस द्वारा हिंगोनिकर से कड़ी पूछताछ के बाद एसआईटी टीम ने उनकी दी गई गुप्त जानकारी के आधार पर सोलापुर में जाल बिछाया और गरुड़ को पकड़ लिया।
