कचरा नहीं ग्रीन फ्यूल: भोपाल में मक्के के भुट्टों से बनाई जा रही CNG

भोपाल। अब नगर निगम के प्रयासों से शहर के वेस्ट से सीएनजी गैस बनाने का कार्य निरंतर जारी है. इसके लिए भौंरी स्थित पालीवाल बायो एनर्जी के पांच टन के बायो सीएनजी प्लांट में गर्मी के दिनों में गन्ने की चरखी से निकलने वाले सूखे कचरे से सीएनजी गैस का निर्माण किया गया था वहीं अब बारिश के शुरू होते ही मक्के के भुट्टों की आवक बढ़ गई है. इसके बेस्ट से इसी प्लांट में सीएनजी बनाने का कार्य शुरू हो गया है.

बोरियोंं भरकर गार्वेज स्टेशन पर इकठ्ठा

बताया जाता है कि दिनों में शहर में भुट्टे के ठेेले और दुकानों से मिले डंठल के जरिए बायो सीएनजी बनना शुरू हो गई है। शहर के विभिन्न इलाकों में लगने वाली गन्ने की चरखी के साथ भुट्टों के ठेलों और दुकानों से रोजाना कचरा इकठ्ठा कर भौंरी भेजा जा रहा है. जहां बायो सीएनजी प्लांट में इस कचरे को डालकर इससे रोजाना बायो सीएनजी बनाई जा रही है.

ठेलों से इकठ्ठा होता है भुट्टों का वेस्ट :

शहर के विभिन्न इलाकों में इन दिनों 4 हजार से ज्यादा भुट्टे के ठेले लग रहे हैं. ऐसे में नगर निगम रोजाना 100 से 120 क्विंटल छिलके और डंठल और अन्य जैविक पदार्थ निकालकर भौंरी निष्पादन के लिए भेजा रहा है.

रोजाना बन रही है डेढ़ क्विंटल सीएनजी :

इस प्लांट से नगर निगम को प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल सीएनजी मिलेगी. जिसका उपयोग बायो सीएनजी से चलते वाले वाहनों में किया जाएगा. इस तरह से ग्रीन फ्यूल को तैयार कर नगर निगम के वाहनों में ही उपयोग किया जाएगा. इससे डीजल जैसे प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन पर निगम की निर्भरता कम होगी और कचरे से तैयार बायो सीएनजी का उपयोग वाहनों में होने से कचरे का भी पूरी तरह से निष्पादन हो जाएगा .

इनका कहना है.

भुट्टों के डंठल और गन्ने के सूखे कचरे में जैविक ऊर्जा होती है. इनका उपयोग कर ग्रीन फ्यूल तैयार किया जाता है। इस का उपयोग वाहनों के ईंधन में किया जाता है.

वरुण अवस्थी, अपर आयुक्त नगर निगम

 

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