जबलपुर: शहर का व्यस्त कछपुरा रेलवे क्रॉसिंग एक बार फिर लोगों की लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों का केंद्र बनता जा रहा है। रेलवे और प्रशासन द्वारा लगातार चेतावनी दिए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपनी जान जोखिम में डालकर बंद फाटक के नीचे से निकलते हुए या सीधे रेलवे ट्रैक पार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब ऐसे स्थान पर हो रहा है जहां हर समय ट्रेनों की आवाजाही बनी रहती है और मामूली सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कछपुरा क्षेत्र पहले भी रेलवे सुरक्षा से जुड़े मामलों के कारण चर्चा में रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फाटक बंद होते ही कई दोपहिया वाहन चालक, पैदल यात्री और कुछ साइकिल सवार नियमों को दरकिनार कर ट्रैक पार करने लगते हैं। कई लोग तो बच्चों को भी साथ लेकर रेलवे लाइन पार करते दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार से गुजरती ट्रेनों के बीच इस तरह की जल्दबाजी न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जान भी खतरे में डाल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे द्वारा बार-बार उद्घोषणाएं की जाती हैं, चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और फाटक बंद होने पर रुकने की अपील भी की जाती है, लेकिन इनका असर बहुत कम दिखाई देता है। लोगों की यह आदत धीरे-धीरे सामान्य व्यवहार बनती जा रही है, जो किसी दिन बड़े हादसे में बदल सकती है।
लगाया जा सकता है अंकुश
इधर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रेलवे स्टेशनों और क्रॉसिंग पर सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाली रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और शासकीय रेलवे पुलिस (GRP) की निगरानी पर स्थानीय नागरिक प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि संवेदनशील समय पर नियमित निगरानी, सख्ती और चालानी कार्रवाई की जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश रेल दुर्घटनाएं तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही के कारण होती हैं। कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है। बंद फाटक के नीचे से निकलना या रेलवे ट्रैक पार करना भारतीय रेलवे के सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
क्या हो रहा है हादसों का इंतज़ार
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि कछपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमों की नियमित तैनाती की जाए, सीसीटीवी निगरानी को और प्रभावी बनाया जाए तथा नियम तोड़ने वालों पर तत्काल जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और आसपास की बस्तियों में विशेष जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाए ताकि लोग रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करने के प्रति गंभीर हों। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते ऐसी लापरवाही पर सख्ती कर कछपुरा रेलवे क्रॉसिंग को सुरक्षित बनाया जाएगा। फिलहाल यहां रोज दिखाई देने वाले ये दृश्य यही संकेत दे रहे हैं कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी दिन बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है।
