इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 21 प्रतिशत बढ़ा, ओमान को निर्यात में पाँच गुना से अधिक उछाल

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (वार्ता) cकी एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, जर्मनी, चीन, सिंगापुर और ओमान जैसे देशों से मजबूत मांग के कारण भारत का इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात इस वर्ष जून माह में 11.48 अरब डॉलर के स्तर पर रहा जो पिछले वर्ष इसी महीने की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष जून में इंजीनियरिंग निर्यात यह 9.51 अरब डॉलर था। ईईपीसी इंडिया की एक विज्ञप्ति के अनुसार ओमान को इंजीनियरिंग निर्यात जून में सालाना आधार पर पाँच गुना से अधिक बढ़कर 25.9 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया जबकि चीन को निर्यात सालाना आधार पर 74 प्रतिशत की बढ़कर 36.15 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।अमेरिका अब भी भारत के इंजीनियरिंग सामानों का सबसे बड़ा विदेशी बाजार बना हुआ है जहां जून कुल 1.95 अरब डॉलर का निर्यात हुआ।

जून में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में पश्चिम एशिया के कुछ बाजारों को छोड़ सभी प्रमुख बाजारों में वृद्धि दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में कुल मिला कर निर्यात बढ़ा। क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब को निर्यात में कमी हुई। इसके बावजूद, भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने के बाद ओमान को निर्यात में 420 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जिससे पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (वाना) क्षेत्र में कुल मिला कर इंजीनियरिंग निर्यात वृद्धि बनी रही ।
इस दौरान तुर्किये को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात जून में भी बढ़ा जबकि पिछले वर्ष इस बाजार में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई थी। ईईपीसी इंडिया की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस वर्ष जून में 34 में से 27 इंजीनियरिंग उत्पाद श्रेणियों (पैनल) में निर्यात वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सात श्रेणियों—जिनमें लेड एवं उसके उत्पाद, आईसी इंजन, एटीएम मशीनरी, क्रेन, लिफ्ट एवं विंच, कार्यालय उपकरण तथा प्राइम माइका शामिल हैं—में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई।

जून के व्यापारिक आंकड़ों पर ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा: “पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक अनिश्चितता और व्यापारिक व्यवधानों के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात क्षेत्र ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। चालू वित्त वर्ष के पिछले तीन महीनों में इंजीनियरिंग निर्यात लगातार 10 अरब अमेरिकी डॉलर से ऊपर बना हुआ है। यह दर्शाता है कि उद्योग ने बदलते वैश्विक व्यापारिक माहौल के अनुरूप खुद को सफलतापूर्वक ढाल लिया है। हालांकि, उभरती चुनौतियों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, इस विकास की गति बनाए रखने के लिए भारत सरकार से निरंतर सहयोग भी जरूरी है।”

सरकार के त्वरित अनुमानों के अनुसार, जून 2026 में भारत के कुल माल निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी 28.4 प्रतिशत रही।संचयी आधार पर, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 34.14 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 28.91 अरब अमेरिकी डॉलर था। इस प्रकार 18.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कुल माल निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं की हिस्सेदारी 26.4 प्रतिशत रही।

अप्रैल-जून 2026-27 के दौरान 34 में से 29 इंजीनियरिंग उत्पाद श्रेणियों में निर्यात वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पाँच श्रेणियों—लेड एवं उसके उत्पाद, आईसी इंजन, क्रेन, लिफ्ट एवं विंच, कार्यालय उपकरण तथा प्राइम माइका में गिरावट रही। क्षेत्रवार विश्लेषण से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में सभी क्षेत्रों में भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात बढ़ा। उत्तर अमेरिका ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के साथ बरकरार रखी, इसके बाद यूरोपीय संघ (17 प्रतिशत), वाना (14 प्रतिशत), आसियान (11 प्रतिशत) और उत्तर-पूर्व एशिया (9 प्रतिशत) का स्थान रहा।

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