रुबियो ने दक्षिण-पूर्व एशिया में चार अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की

मनीला, 22 जुलाई (वार्ता) अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को भरोसा दिलाया है कि इस क्षेत्र के प्रति अमेरिकी की प्रतिबद्धता पर अन्य क्षेत्रों में जारी संकटों का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने चार अरब डॉलर से ज़्यादा के रणनीतिक निवेश एवं सहायता की घोषणा करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत में अमेरिका की भागीदारी के लिए आसियान केंद्र में बना रहेगा।

श्री रुबियो ने मनीला में आसियान मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका दक्षिण-पूर्व एशिया को अपने आर्थिक एवं रणनीतिक हितों के लिए बहुत ज़रूरी मानता है। उन्होंने इस क्षेत्र के साथ एक मज़बूत साझेदारी का वादा किया क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते आर्थिक केंद्रों में से एक के रूप में उभर रहा है।

श्री रुबियो ने पिछले वर्ष अमेरिका-आसियान शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि हम शत प्रतिशत आसियान के साथ हैं। उन्होंने इस क्षेत्रीय समूह को मुख्य माध्यम कहा जिसके ज़रिए वह इस क्षेत्र के साथ जुड़ते हैं।उन्होंने अमेरिका की लंबे समय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिकी सरकार के 2.5 अरब डॉलर के रणनीतिक निवेश की घोषणा की। इसका उद्देश्य आर्थिक मजबूती, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल संपर्क एवं आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि यह अनुदान पारंपरिक विदेशी सहायता है।

श्री रूबियो ने कहा, “यह कोई दान नहीं है। हम यह इसलिए नहीं कर रहे हैं कि हम अच्छे लोग हैं बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय हित में है। आपके देशों और पूरे क्षेत्र के साथ हमारी साझेदारी अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है और हम इसे कभी नहीं छोड़ेंगे।”इस निवेश पैकेज के साथ-साथ, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास वित्त निगम से विमानन अवसंरचना, उर्जा सुरक्षा और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 1.5 अरब डॉलर का नया अनुदान मिलेगा। यह कदम उस इलाके में अपनी आर्थिक मौजूदगी बढ़ाने की अमेरिका की कोशिश को दर्शाता है, जिसे अब वैश्विक विनिर्माण एवं व्यापार के लिए बहुत अहम माना जा रहा है।

श्री रुबियो ने आसियान देशों में बारूदी सुरंगें हटाने के कार्यक्रमों के लिए लगभग 13 करोड़ डॉलर की सहायता की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस पहल से आम लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी और साथ ही व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे आसियान अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है, अमेरिका द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के विकास, बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण, नागरिक परमाणु ऊर्जा, ज़रूरी खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं और क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना के लिए अपना समर्थन बढ़ा रहा है।

श्री रुबियो ने दक्षिण-पूर्व एशिया को आने वाले दशकों का अहम भू-राजनीतिक क्षेत्र बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में होने वाली गतिविधियां 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देंगी। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे-जैसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बदल रही हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाएं बढ़ रही हैं, अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया की समृद्धि आपस में और ज़्यादा जुड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया की सुरक्षा और समृद्धि हमेशा एक-दूसरे पर निर्भर रहेगी। वॉशिंगटन, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा परिवर्तन और मज़बूत आपूर्ति श्रृंखला जैसे उभरते हुए क्षेत्र में आसियान का पसंदीदा सहयोगी बनना चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका का इरादा सिर्फ़ दिखावटी जुड़ाव के बजाय व्यावहारिक आर्थिक समाधान पेश करने का है।

श्री रुबियो का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और दक्षिण चीन सागर में लगातार जारी विवादों के बीच मनीला में आसियान देशों के विदेश मंत्री और बड़ी शक्तियां इकट्ठा हुई हैं और अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।

मंगलवार को मनीला में आसियान के विदेश मंत्रियों की सालाना बैठक शुरू हुई। इस बैठक में ज़्यादा एकता के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया गया क्योंकि यह संगठन बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, समुद्री विवादों और क्षेत्रीय संघर्षों से जूझ रहा है।

 

फिलीपींस की विदेश मामलों की सचिव थेरेसा पी. लाज़ारो ने 59वीं आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया को लगातार अस्थिर होते वैश्विक माहौल का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे बंटवारे के बजाय सक्रियता से और सोच-समझकर समस्या को सुलझाने के उपायों से इसका जवाब दें।

फिलीपींस की 2026 की आसियान अध्यक्षता की थीम “साथ मिलकर अपने भविष्य की राह बनाना” का उल्लेख करते हुए, सुश्री लाज़ारो ने कहा कि इस समूह को वैश्विक घटनाओं से प्रभावित होने के बजाय अपना भविष्य खुद निर्धारित करना चाहिए।

सुश्री लाज़ारो ने मैत्री और सहयोग की संधि (टीएसी) की 50वीं सालगिरह पर इस समझौते को आसियान का “सबसे भरोसेमंद आधार” बताया। उन्होंने कहा कि संप्रभुता के लिए आपसी सम्मान, दखल न देने और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के इसके सिद्धांत, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया में बढ़ती गुटबाज़ी इस बात पर बल देती है कि आसियान सदस्य मिलकर काम करें। सुश्री लाज़ारो ने कहा, “बंटे हुए वैश्विक माहौल में, कोई भी एक देश अकेले इन तूफ़ानों का सामना नहीं कर सकता। हमारी ताक़त और मुश्किलों से उबरने की क्षमता हमारे समुदाय में है। अगर हम एकजुट होकर आगे नहीं बढ़े, तो हमारे बिखरने का ख़तरा है।”

यह बैठक आसियान की केंद्रीय भूमिका को मज़बूत करने, ‘आसियान सामुदायिक दृष्टिकोण 2045’ को आगे बढ़ाने और बातचीत में शामिल साझेदारों के साथ सहयोग को गहरा करने पर भी केंद्रित होगी, क्योंकि यह समूह हिंद-प्शांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी राह बनाने की कोशिश कर रहा है।

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