
वाशिंगटन, 22 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी सीनेट की विनियोग समिति को बताया है कि ईरान के साथ युद्ध में अब तक 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं और यह कार्रवाई आगे बढ़ेगी, तो खर्च और बढ़ सकता है।
सीनेट समिति के सामने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के साथ पेश होते हुए श्री हेगसेथ ने 87.6 अरब डॉलर के अतिरिक्त आपात बजट की मंजूरी मांगी। इसमें से 67 अरब डॉलर से अधिक की राशि सीधे सैन्य अभियानों के लिए रखी गई है। उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया भर में बढ़ते खतरों को देखते हुए अमेरिका को अपनी सुरक्षा तैयारियों के लिए भारी संसाधनों की सख्त जरूरत है।
इस महीने अमेरिका-ईरान के बीच फिर से शुरू हुए जंग के बाद आयोजित इस पहली सुनवाई में माहौल काफी गर्म रहा। दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिक) के सांसदों ने युद्ध की भारी वित्तीय लागत, शहीद एवं घायल होते सैनिकों और युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य न होने को लेकर सरकार की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए।
श्री हेगसेथ ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि इस जंग में अब तक ‘37.5 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि खर्च हो चुकी है, जिसमें चालू वित्त वर्ष के अंत तक होने वाले सभी सैन्य परिचालन खर्चे शामिल हैं। उन्होंने कहा, “जैसा कि आप सभी जानते हैं, हम एक बेहद खतरनाक दौर और दुनिया में जी रहे हैं, जहाँ बड़े और कड़े फैसले लेने की जरूरत है। यह बजट मांग हमारे रक्षा मंत्रालय की तुरंत की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बेहद जरूरी और अनिवार्य कदम है।” उन्होंने बताया कि इस आपात बजट का इस्तेमाल अमेरिकी सेना को मजबूत करने, युद्ध में नष्ट हुए हथियारों और सामान की भरपाई करने और नए तथा आधुनिक हथियारों का निर्माण तेज करने के लिए किया जाएगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय इस बजट में से 20 अरब डॉलर युद्ध में इस्तेमाल हुए साजो-सामान की भरपाई करने, विदेशों में तैनात सैनिकों को राशन-पानी और सुविधाएं देने, नए सैनिकों की संख्या बढ़ाने और नेशनल गार्ड को तैयार रखने पर खर्च करना चाहता है। वहीं, बचे हुए 40 अरब डॉलर का इस्तेमाल हाइपरसोनिक मिसाइलों, स्मार्ट बमों , ड्रोन विरोधी तकनीकों, सॉलिड रॉकेट मोटरों और मजबूत सैटेलाइट नेटवर्क के उत्पादन को रफ्तार देने के लिए होगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा, “हम बात कर रहे हैं सॉलिड रॉकेट मोटरों, स्मार्ट बमों, हाइपरसोनिक हथियारों और ड्रोन मार गिराने वाली क्षमताओं की। इसके अलावा, इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल सुरक्षा और अंतरिक्ष में अमेरिका का वर्चस्व बनाए रखने पर खर्च किया जाएगा।”
इतने बड़े बजट की मांग करने के बावजूद, रक्षा मंत्री सांसदों को यह समझाने में नाकाम रहे कि आखिर इस युद्ध में अमेरिका के लिए ‘जीत’ का क्या पैमाना होगा या जीत किसे माना जाएगा।
इस दौरान माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद जॉन ओसॉफ ने रक्षा मंत्री हेगसेथ के उस पुराने दावे को याद दिलाया जिसमें उन्होंने ईरान की सेना के पूरी तरह तबाह होने की बात कही थी। श्री ओसॉफ ने सीधे सवाल किया, “आप आज फिर अरबों डॉलर मांगने आए हैं, लेकिन क्या आप यह जवाब देंगे कि युद्ध के 14वें दिन आपका यह बयान कि ईरान की सेना ‘पूरी तरह नष्ट’ और ‘अक्षम’ हो चुकी है, अमेरिकी जनता से बोला गया सच था या झूठ? क्या ईरान की सेना पिछले चार महीनों से सचमुच युद्ध लड़ने में पूरी तरह नाकाम और बेकार हो चुकी है?”
इसके जवाब में श्री हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सेना ‘केवल कुछ साल ही नहीं, बल्कि दशकों पीछे’ धकेली जा चुकी है, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि कमजोर होने के बावजूद उस सेना के पास अब भी हमला करने की ‘कुछ क्षमताएं’ बची हुई हैं।
रक्षा मंत्री ने अपनी सफाई में कहा, “किसी ने यह दावा कभी नहीं किया था कि ईरान की एक-एक मिसाइल खत्म हो गई है। जब हम कहते हैं कि सेना अक्षम हो गई है, तो इसका मतलब यह होता है कि वे अपने भूमिगत बंकरों से मिसाइलें निकालकर हम पर दागने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उनके पास बंकरों में मिसाइलें बची ही नहीं हैं। वे दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले सबसे बड़े देश हैं, इसलिए उन्होंने हथियार छिपाकर रखे हैं।”
युद्ध का मुख्य उद्देश्य समझाते हुए श्री हेगसेथ ने कहा, “आपने मुझसे हमारा सबसे बड़ा मकसद पूछा, तो मैं कहूंगा कि हमारा एकमात्र लक्ष्य यह तय करना है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न आ सकें। और हमारे हालिया हमलों का मुख्य मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की जासूसी और देखने-समझने की ताकत को पूरी तरह खत्म करना है।”
इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा देने के लिए एक ‘गुप्त अभियान’ चला रही है। उन्होंने बताया कि ईरानी हमलों के सीधे खतरे के बावजूद अमेरिकी सेना ने अब तक लगभग 50 करोड़ बैरल कच्चे तेल से भरे जहाजों को वहां से सुरक्षित निकाला है।
जब सांसदों ने उन रिपोर्टों पर सवाल पूछे कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अति-सुरक्षित भूमिगत परमाणु ठिकाने ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर बड़े हमले की योजना बना रहे हैं, तो श्री हेगसेथ ने अपनी सैन्य रणनीति का खुलासा करने से साफ इनकार कर दिया।
श्री ट्रंप द्वारा उस ठिकाने पर ‘बहुत जल्द’ बड़ा हमला करने के बयान के कुछ ही घंटे बाद रक्षा मंत्री ने बस इतना कहा, “हमारी कई सैन्य क्षमताएं और रणनीतियां गोपनीय हैं।”वहीं, अमेरिकी सेना के शीर्ष कमांडर जनरल डैन केन ने सांसदों को भरोसा दिया कि किसी भी नए हमले या युद्ध को बढ़ाने से पहले सैन्य कमांडर राष्ट्रपति के सामने ‘सभी विकल्प और संभावित खतरे एवं जोखिम’ जरूर रखेंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध में होने वाले इंसानी नुकसान को ध्यान में रखकर ही हर कदम उठाया जा रहा है।
सुनवाई में न्यू यॉर्क की सांसद किर्स्टन गिलिब्रैंड ने देश में बढ़ती महंगाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार द्वारा युद्ध पर पानी की तरह पैसा बहाने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “रक्षा मंत्री जी, आप एक ऐसे युद्ध के लिए अरबों डॉलर का अतिरिक्त बजट मांग रहे हैं, जिसके बारे में आपने खुद कहा था कि यह महज कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा। जबकि सच यह है कि राष्ट्रपति के पास इस युद्ध को खत्म करने की न कोई योजना है और न ही क्षमता।”
श्री हेगसेथ ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए सांसद पर आरोप लगाया कि वे ‘सदन में भाषण देकर अपने चुनाव प्रचार के लिए वीडियो विज्ञापन बनाने की कोशिश कर रही हैं।’उधर, मिशिगन के सांसद गैरी पीटर्स ने रक्षा मंत्री पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए उनके नेतृत्व को ‘पूरी तरह असफल’ करार दिया और युद्ध से निपटने के तरीकों पर गहरे सवाल खड़े किए।
जनरल डैन केन ने भी सांसदों से कहा, “हर अमेरिकी नागरिक को यह समझना होगा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। नई-नई तकनीकों के आने से हमारे लड़ने के तौर-तरीके हमेशा के लिए बदल गए हैं।”
हालांकि, इस लंबी सुनवाई के खत्म होने तक सांसदों को इस बात का कोई जवाब नहीं मिला कि यह युद्ध कब खत्म होगा और जीत को कैसे मापा जाएगा। दूसरी ओर, श्री ट्रंप के बयानों से यही संकेत मिल रहे हैं कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर नए हमलों के साथ यह जंग आने वाले दिनों में और विकराल रूप ले सकती है।
