डीएनए रिपोर्ट से खुलेगा राज, अखिलेश के शव की पहचान पर सस्पेंस बरकरार

इंदौर. पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी हत्याकांड में आरोपी पति अखिलेश सैनी के शव को लेकर अब भी संशय बना हुआ है. गंजबासौदा रेलवे ट्रैक पर मिले सिरकटे शव को परिजन अखिलेश का बता रहे हैं, लेकिन पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही इसकी पुष्टि करेगी. पुलिस को अब डीएनए जांच रिपोर्ट का इंतजार है. रिपोर्ट आने के बाद ही शव की पहचान और मौत की परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

संयोगितागंज थाना प्रभारी केपी यादव ने बताया कि गंजबासौदा पुलिस से अभी केस डायरी प्राप्त नहीं हुई है. डायरी मिलने के बाद सुसाइड नोट, घटनाक्रम और अन्य साक्ष्यों की स्थिति स्पष्ट होगी. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उर्मिला की हत्या के बाद अखिलेश आठ दिन तक कहां रहा और रेलवे ट्रैक पर मिला शव किन परिस्थितियों में पहुंचा. जांच में यह भी सामने आया है कि अखिलेश अपने दोनों मोबाइल फोन, स्कूटी और एटीएम कार्ड घर पर छोड़ गया था. बच्चों के स्कूल से निकलने के दौरान उसने ऐसा रास्ता चुना था, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे. पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कहीं उसने जांच को भटकाने के लिए कोई सुनियोजित कदम तो नहीं उठाया.

गौरतलब है कि रेलवे ट्रैक पर एक सिरकटा शव मिला था. शव के पास से मिले आधार कार्ड, दस्तावेज और सुसाइड नोट के आधार पर अखिलेश के पिता सीताराम सैनी और भाई चित्रेश सैनी ने उसकी पहचान की थी. अखिलेश के पिता सीताराम ने शरीर पर मौजूद कुछ निशानों के आधार पर भी शव को बेटे का बताया. उन्होंने पुलिस को बताया कि अखिलेश की नाभि में बीमारी के कारण सूजन थी और शरीर पर सफेद दाग भी थे. हालांकि पुलिस का कहना है कि अंतिम पुष्टि डीएनए जांच के बाद ही होगी. वहीं फोरेंसिक एक्सपर्ट का मानना है कि डीएनए जांच से मृतक की पहचान स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह जानने के लिए शरीर के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच जरूरी है. सिर नहीं मिलने के कारण चोट और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मौत के तरीके का पता लगाना चुनौतीपूर्ण होगा. शव के पास से तीन सुसाइड नोट मिलने की बात भी सामने आई है. इनमें एक पिता सीताराम सैनी के नाम, दूसरा बेटे अव्यक्त उर्फ प्रायु के नाम और तीसरा पुलिस के नाम बताया जा रहा है. पुलिस के नाम लिखे नोट में अखिलेश और उर्मिला के बीच विवाद तथा कुछ लोगों पर लगाए गए आरोपों का उल्लेख है, पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है. मामले में एक प्रमुख तथ्य यह भी सामने आया हैं कि अखिलेश की 15 वर्षीय बेटी प्रेक्षा ने शव को देखकर पहचान करने से इनकार कर दिया. उसका कहना था कि सिर नहीं होने की स्थिति में वह निश्चित रूप से शिनाख्त नहीं कर सकती. वहीं, सात वर्षीय बेटा अव्यक्त उर्फ प्रायु फिलहाल खंडवा में नाना नानी के साथ रह रहा है. परिजन ने उसे अभी तक पिता की मौत की जानकारी नहीं दी है.

 

सभी तथ्यों का परीक्षण कर पुष्टि की जा रही है…

मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. केस डायरी मिलने के बाद सुसाइड नोट और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा. डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही शव की पहचान की अंतिम पुष्टि हो सकेगी. साथ ही फरारी के दौरान अखिलेश की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है.

केपी यादव, थाना प्रभारी संयोगितागंज

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