विजयवाड़ा, 20 जुलाई (वार्ता) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री राजीव रंजन सिंह को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे जलीय कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए झींगा का चारा बनाने वाली कंपनियों को आनुवंशिक रूप तैयार (जीएम) सोयाबीन दाना आयात करने की अनुमति दें।
श्री नायडू ने बताया है कि झींगे के चारे में इस्तेमाल होने वाले मुख्य कच्चे माल, सोयाबीन मील की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण चारे के उत्पादन की लागत काफी बढ़ गई है, जिससे झींगा पालकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि वे घरेलू कमी को पूरा करने और कीमतों को स्थिर करने के लिए सोयाबीन मील के आयात की अनुमति दें। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 2021 में भी झींगा चारा बनाने वाली कंपनियों को सीमित स्तर पर ऐसी आयात अनुमति दी गयी थी।
उन्होंने कहा कि इक्वाडोर से झींगे के उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गयी है, जिससे अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए स्थिति मुश्किल होती जा रही है।
एक अन्य चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री से आंध्र प्रदेश के जलीय कृषि क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए अमरावती में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) का क्षेत्रीय दफ्तर खोलने का अनुरोध किया। सरकार ने क्षेत्रीय दफ्तर, प्रशिक्षण केंद्र , मत्स्य पार्क और सार्वजनिक एक्वेरियम (पानी से भरा एक ऐसा पारदर्शी टैंक होता है, जिसमें मछलियों, जलीय पौधों और अन्य जीवों को पाला जाता है।) बनाने के लिए 7.89 एकड़ ज़मीन आवंटित की है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा ‘नीली अर्थव्यवस्था’ के विकास के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगी।
श्री नायडू ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भी पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश के जलीय कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की। उन्होंने बताया कि इक्वाडोर से अमेरिका, चीन और यूरोप को झींगे के निर्यात में बढ़ोतरी के कारण वैश्विक स्तर पर झींगे की कीमतों में भारी गिरावट आई है। उन्होंने केंद्र से मछली का दाने की घरेलू उपलब्धता को नियंत्रित करने का आग्रह किया, जो झींगे के चारे का एक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने कहा कि फिश मील के निर्यात पर अभी पांच प्रतिशत का निर्यात प्रोत्साहन मिलता है, जिससे घरेलू चारा निर्माताओं को यह सामग्री ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ती है।
श्री नायडू ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) से निर्यात को नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि निर्यात की अनुमति देने से पहले घरेलू ज़रूरतों को पूरा किया जाए। उन्होंने जीएम सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने की अपनी मांग भी दोहराई।
