महू/सिमरोल:मानसून की बेरुखी के चलते महू तहसील के किसान इन दिनों भारी परेशानी से गुजर रहे हैं. खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन अब दम तोड़ने लगी है. खेतों में दरारें साफ नजर आने लगी हैं. 23 दिन की हो चुकी सोयाबीन की फसल को अब किसी भी हाल में पानी की सख्त आवश्यकता है. इस बार महू तहसील में लगभग 36 हजार हेक्टेयर भूमि पर सोयाबीन की बोवनी की गई है.
फसल में अब तक एक स्प्रे भी किया जा चुका है, लेकिन बारिश नहीं होने से स्थिति नाजुक बनी हुई है. किसानों का दर्द यह है कि कभी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से नुकसान होता है तो कभी मौसम की मार झेलनी पड़ती है. किसानों को बहुत कम ऐसा मौका मिलता है, जब उनकी फसल भी अच्छी हो और फसल का उचित दाम भी उन्हें मिल जाए.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीके मिश्रा ने किसानों को सलाह देते हुए कहा है कि सोयाबीन की फसल के लिए अभी स्थिति नाजुक है. फसल को राहत देने के लिए किसानों को खेतों में निंदाई-गुड़ाई के साथ डोरे चलाने चाहिए. इससे खरपतवार भी निकलेगा और जमीन की नमी भी बरकरार रहेगी. वहीं हल्के खेतों में फसल को बचाने के लिए मिनी स्पि्रंकलर का प्रयोग किया जा सकता है, ताकि फसल सूख न पाए. इस समय कीटनाशक का छिड़काव न करें.
