
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने *सिंगरौली* की बीटेक छात्रा की संदिग्ध मौत की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि पुलिस विवेचना निष्पक्ष, वैज्ञानिक और भरोसा जगाने वाली नहीं दिखती। न्यायालय ने चार्जशीट दाखिल होने और ट्रायल शुरू हो जाने के कारण सीबीआई अथवा एसआईटी से नए सिरे से जांच कराने से इन्कार कर दिया। हालांकि पीडि़त पक्ष को ट्रायल कोर्ट में आरोपों में संशोधन अथवा नई धाराएं जोडऩे के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है।
दरअसल सिंगरौली निवासी दीपांजलि पनिका ने यह याचिका दायर कर अपनी बहन की मौत की सीबीआई अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच, संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तथा मुआवजे की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना, राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा तथा प्रतिवादी नम्बर दो की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने पक्ष रखा। मृतका एलएनसीटी कालेज की बीटेक (कंप्यूटर साइंस) की छात्रा थी और उसका शव सिंगरौली के भगत सिंह कालोनी में 22 जून, 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।
