न्यूयॉर्क, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से भारत ने 2028-29 की अवधि के लिए अस्थायी सदस्यता हेतु आधिकारिक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में वैश्विक राजनयिकों के समक्ष भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए समावेशी दृष्टिकोण पर बल दिया। भारत ने आठ बार पहले भी सुरक्षा परिषद में जिम्मेदारी निभाई है, जिससे विकासशील देशों का भारत के नेतृत्व पर अटूट भरोसा है।
चीन की प्रतिक्रिया और वैश्विक समर्थन
भारत की इस दावेदारी पर चीन ने ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाते हुए सधी हुई प्रतिक्रिया दी है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस जैसे अन्य चार स्थायी सदस्यों ने भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन किया है। चीन का यह रुख भारत की बढ़ती वैश्विक सक्रियता और प्रभाव के प्रति बीजिंग की सतर्कता को दर्शाता है। सुरक्षा परिषद के सुधारों को अनिवार्य बताते हुए भारत ने तर्क दिया है कि 80 साल पुराना ढांचा वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है।
सुधारों की अनिवार्यता और मुकाबला
एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए भारत का मुकाबला ताजिकिस्तान से है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक वैश्विक शांति का लक्ष्य अधूरा रहेगा। भारत का अभियान न केवल अपनी सदस्यता के लिए है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के प्रभावी संचालन के लिए ढांचागत सुधारों की भी वकालत कर रहा है, जो वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती साख का प्रमाण है।

