जबलपुर: शहर में मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों का बढ़ता चलन अब आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। प्रमुख सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों में बड़ी संख्या में युवा बुलेट, पल्सर सहित अन्य बाइकों के साइलेंसर में बदलाव कर तेज आवाज के साथ वाहन दौड़ा रहे हैं। कई जगह बाइक से पटाखों जैसी आवाजें निकालकर स्टंटबाजी भी की जा रही है, जिससे राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी इस तरह की हरकतें लगातार देखने को मिल रही हैं। जानकारी के अनुसार कई दोपहिया वाहन मरम्मत केंद्रों पर बिना वैधानिक अनुमति के बाइकों के साइलेंसर से मफलर हटाकर या उनमें संशोधन कर अत्यधिक शोर पैदा करने वाले साइलेंसर लगाए जा रहे हैं। इससे वाहन निर्धारित ध्वनि मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि कुछ युवक जानबूझकर एक्सीलेटर देकर पटाखों जैसी आवाज निकालते हैं, जिससे सड़क पर चल रहे लोग अचानक घबरा जाते हैं और कई बार दुर्घटना की आशंका भी बन जाती है।
बढ़ रहा बीमारियों का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यतः 80 डेसीबल तक की ध्वनि सुरक्षित मानी जाती है, जबकि मॉडिफाइड साइलेंसर वाली कई बाइकों से 125 डेसीबल या उससे अधिक शोर उत्पन्न होता है। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार तेज ध्वनि के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ-साथ उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, अनिद्रा, तनाव, हृदय गति में अनियमितता और हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण केवल असुविधा नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी गंभीर विषय बनता जा रहा है।
मॉडिफाइड बाईक्स की जांच हो
शहरवासियों ने पुलिस और परिवहन विभाग से विशेष अभियान चलाकर मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों की जांच करने, अवैध साइलेंसर जब्त करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण और सड़क पर स्टंटबाजी पर रोक लगाने से ही शहर में सार्वजनिक शांति और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
