
जबलपुर। हाइकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायाधीश विनय सराफ की विशेष पीठ ने बुधवार को मध्य प्रदेश के बहुचर्चित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में मेरिट पर नियमित सुनवाई शुरू की। पहले दिन आरक्षण बढ़ाने के निर्णय को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने से आरक्षण की 50 प्रतिशत संवैधानिक सीमा का उल्लंघन होता है। विस्तृत बहस पूरी नहीं हो सकी। विशेष पीठ ने मामले की अगली सुनवाई आज गुरुवार दोपहर ढाई बजे निर्धारित की है।
विशेष पीठ के समक्ष वर्ष 2019 में राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के निर्णय को चुनौती देने वाली 91 याचिकाओं पर प्रतिदिन सुनवाई हो रही है। बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने संविधान के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू होने से कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है। उनकी दलीलें गुरुवार को भी जारी रहेंगी। उल्लेखनीय है कि यह विवाद पिछले सात वर्षों से न्यायिक विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट से वापस आने के बाद हाईकोर्ट की विशेष पीठ इस मामले की नियमित सुनवाई कर रही है। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेशों के कारण प्रदेश की अनेक सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ फिलहाल लागू नहीं हो सका है। इसलिए इस मामले के अंतिम निर्णय पर लाखों अभ्यर्थियों और राज्य सरकार, दोनों की निगाहें टिकी हैं।
