
इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर में नवनिर्मित 300 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय के लोकार्पण अवसर पर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में एक समान कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और इसके लिए व्यापक जनसंवाद की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक देश में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग कानून होने के बजाय सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर रामचंद्र एक शादी करता है तो रहीम से भी एक ही शादी की अपेक्षा की जा सकती है। मुस्लिम बहनें भी हमारी बहन हैं, उनके हितों और अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।”
उन्होंने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के “एक देश, एक निशान, एक प्रधान और एक विधान” के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धारा-370 हटाकर उस संकल्प को आगे बढ़ाया है और अब मध्य प्रदेश भी समान नागरिक संहिता की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति ने प्रदेश के सभी जिलों और संभागों में जाकर सुझाव लिए हैं, जिनके आधार पर सरकार आगे की प्रक्रिया तय कर रही है।
पश्चिमी इंदौर को मिला नया जिला अस्पताल
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 83.16 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चार मंजिला 300 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय का लोकार्पण भी किया। यह अस्पताल पश्चिमी इंदौर की लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को काफी हद तक पूरा करेगा।
हालांकि अस्पताल की सभी सेवाएं एक साथ शुरू नहीं होंगी। पहले चरण में 34 बिस्तरों वाली मातृ एवं प्रसूति इकाई शुरू की गई है, जबकि मेडिसिन, सर्जरी, अस्थि रोग और अन्य विशेषज्ञ विभागों का संचालन चरणबद्ध रूप से शुरू किया जाएगा।
दो दशक पुराने इंतजार के बाद मिला अस्पताल
धार रोड क्षेत्र में संचालित जिला अस्पताल वर्षों से पुराने और सीमित संसाधनों वाले भवन में काम कर रहा था। बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को देखते हुए नए अस्पताल का प्रस्ताव वर्षों पहले भेजा गया था। लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्माण कार्य में हुई देरी के बाद अब यह परियोजना मूर्त रूप ले सकी है।
लागत में चार गुना से अधिक बढ़ोतरी
परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 18 करोड़ रुपये थी, लेकिन समय के साथ तकनीकी बदलाव, अतिरिक्त निर्माण कार्य और संशोधित स्वीकृतियों के कारण खर्च बढ़कर 83.16 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके बावजूद अस्पताल की सभी सेवाएं फिलहाल शुरू नहीं हो पा रही हैं।
166 स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति
अस्पताल के संचालन के लिए 166 अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होते ही अस्पताल की शेष सेवाएं भी आम जनता के लिए शुरू कर दी जाएंगी।
हजारों परिवारों को मिलेगा लाभ
नए अस्पताल से चंदन नगर, राजेंद्र नगर, द्वारकापुरी, सिरपुर, नूरानी नगर समेत पश्चिमी इंदौर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलेगी। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को अब उपचार के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जबकि अन्य विशेषज्ञ सेवाओं के शुरू होने का इंतजार अभी बाकी है।
