मुंबई/नयी दिल्ली, 14 जुलाई (वार्ता) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अहम मुलाकात कर ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के शिवसेना में विलय के कानूनी पहलुओं को सुलझाने और आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में शिंदे गुट की हिस्सेदारी तय करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अगर इन छह बागी सांसदों के विलय को आधिकारिक मंजूरी देते हैं तो निचले सदन में शिवसेना की ताकत सात से बढ़कर 13 हो जायेगी। इससे केंद्र सरकार में शिवसेना का दावा और मजबूत होगा, जिसके एवज में उन्हें कम से कम एक कैबिनेट और कुछ राज्य मंत्री पद मिल सकता है।
भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मजबूती देने के लिए श्री शिंदे के बेटे तथा कल्याण से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का नाम कैबिनेट मंत्री पद की रेस में सबसे आगे है। सूत्रों का दावा है कि श्री शिंदे ने श्री शाह से बेटे को कैबिनेट में शामिल करने की मांग प्रमुखता से रखी है। इसके अलावा बागी सांसदों में से संजय दीना पाटिल (उत्तर पूर्व मुंबई) और ओमराजे निंबालकर (धाराशिव) को राज्य मंत्री बनाया जा सकता है, जबकि मौजूदा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव की कुर्सी जाने की संभावना है।
वहीं शिवसेना (यूबीटी) ने इस विलय के दावों को खारिज करते हुए कानूनी व राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा है कि छह बागी सांसदों का विलय दावा संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) का सीधा उल्लंघन है।
श्री सावंत ने स्पष्ट किया कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी संसदीय दल का विलय तभी वैध हो सकता है जब मूल दल खुद यह फैसला ले। चूंकि पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने ऐसे किसी विलय को मंजूरी नहीं दी है, इसलिए महज कुछ सांसदों का अलग समूह बनाकर विलय का दावा करना पूरी तरह असंवैधानिक और उन लाखों मतदाताओं के जनादेश का अपमान है, जिन्होंने इन्हें पार्टी के चुनाव चिह्न पर जिताया था।
इसी कड़ी में शिवसेना (यूबीटी) ने सभी छह बागी सांसदों—संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-आष्टीकर और ओमप्रकाश निंबालकर—को सख्त चेतावनी पत्र जारी किया है।
पत्र में कहा गया है, “मीडिया रिपोर्टों से संज्ञान में आया है कि आप शिवसेना में विलय का भ्रम फैला रहे हैं। मूल दल होने के नाते शिवसेना (यूबीटी) ने ऐसे किसी विलय की न तो शुरुआत की है, न सहमति दी है और न अनुमति। मूल दल के विलय के बिना संसदीय दल के किसी हिस्से का विलय कानूनन संभव ही नहीं है।” साथ ही पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष से बागी सांसदों की ऐसी किसी भी याचिका को सिरे से खारिज करने की गुहार लगायी है।
शिवसेना (यूबीटी) आगामी लोकसभा सत्र में इस मुद्दे को कानूनी और तकनीकी आधार पर पूरी ताकत से उठाने की तैयारी में है। मंगलवार को शिंदे-शाह की बैठक में भी इन कानूनी अड़चनों, लोकसभा अध्यक्ष के संभावित रुख और इसके राजनीतिक असर पर गहराई से मंथन हुआ। अब नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार पर टिकी हैं।
