मैहर : जिले के नरोरा के पास नेशनल हाईवे पर रविवार देर रात एक अज्ञात वाहन द्वारा 7 गौवंशों को कुचलने की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. इस दर्दनाक हादसे में 5 गायों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 2 गंभीर रूप से घायल हैं. लेकिन इस त्रासदी ने सिर्फ एक हादसे को नहीं, बल्कि जिले में आवारा पशुओं के प्रबंधन और पशु चिकित्सा सेवाओं की बदहाली को भी पूरी तरह बेनकाब कर दिया है.
संजीवनी एंबुलेंस में दवा नहीं, तड़पती रहीं घायल गायें
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए संजीवनी पशु एंबुलेंस को फोन किया. एंबुलेंस मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन वह सिर्फ एक शो-पीस साबित हुई
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी इंजेक्शन और जीवन रक्षक दवाएं तक उपलब्ध नहीं थीं
तड़पती हुई घायल गायों को समय पर इलाज नहीं मिल सका, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ गई.बाद में उन्हें किसी तरह जिला पशु चिकित्सालय भेजा गया, जहां वे जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं.
55 गौशालाएं, फिर भी सड़कों पर मौत का तांडव क्यों?
इस हादसे ने सतना जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनी गौशालाओं के दावों की हवा निकाल दी है.सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 61 गौशालाओं को मंजूरी मिली थी, जिनमें से 55 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।वर्तमान में 49 गौशालाएं संचालित हैं और इनमें 5540 गौवंश को रखने का दावा किया जा रहा है
बड़ा सवाल यह है कि अगर 49 गौशालाएं चल रही हैं, तो हजारों मवेशी नेशनल हाईवे पर क्यों बैठे हैं? रात के अंधेरे में काले और भूरे रंग के ये मवेशी वाहन चालकों के लिए ‘ब्लैक स्पॉट’ बन रहे हैं. जब तक तेज रफ्तार वाहनों को मवेशी दिखते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. साफ है कि प्रशासन के रेस्क्यू के दावे सिर्फ कागजों पर दौड़ रहे हैं.
फिलहाल पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मूक पशुओं और राहगीरों की जान से खिलवाड़ कर रहे इस सिस्टम की जवाबदेही कब तय होगी?
