आमला: रंजिता यादव की संदिग्ध मौत के मामले में अब पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपियों के पुलिस गिरफ्त से बाहर रहने पर मृतका के परिजन लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। मृतका की बहन द्वारा जारी वीडियो के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वीडियो में उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में आरोपियों को कार्रवाई से बचने का अवसर मिला।
पुलिस बेखबर या जानबूझकर मौक दिया
परिजनों का कहना है कि उन्हें पहले से आशंका थी कि 8 जुलाई को एफआईआर दर्ज होगी। उनका दावा है कि यदि पुलिस को भी इसकी जानकारी थी तो संभावित आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखने या उन्हें कानून के दायरे में बनाए रखने के लिए समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए। उनका कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस 10 जुलाई को आरोपियों के घर पहुंची, लेकिन तब तक घर पर ताला लगा मिला और आरोपी वहां से जा चुके थे।
रसूख का डर था, वही होता नजर आ रहा
मृतका की बहन ने वीडियो संदेश में आरोप लगाया है कि परिवार को शुरू से ही आशंका थी कि प्रभावशाली लोगों का दबाव जांच को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस से घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित करने की मांग भी की गई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि डिजिटल साक्ष्य समय रहते सुरक्षित नहीं किए गए तो महत्वपूर्ण प्रमाण नष्ट होने की आशंका बनी रहेगी।घटना के बाद नगर में यह चर्चा भी तेज है कि यदि किसी सामान्य परिवार का मामला होता तो पुलिस की कार्रवाई क्या इतनी ही धीमी रहती।
हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, परिजन चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि एफआईआर दर्ज होने से पहले और बाद में पुलिस ने क्या-क्या कदम उठाए।आमला थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के घर दबिश दी थी, लेकिन वहां ताला लगा मिला। उन्होंने कहा कि मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
