
जबलपुर। डी.एन. जैन महाविद्यालय के प्रांगण में आयोजित प्रवचन सभा में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भावी पीढ़ी को संस्कारित करने पर जोर देते हुए कहा कि “संतान को संपत्ति दोगे तो वह उसके काम आए, इसकी कोई गारंटी नहीं, लेकिन संस्कार दोगे तो वे जीवनभर साथ देंगे।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल ऊंची-ऊंची बातें करने से नहीं, बल्कि अच्छे आचरण से ही जीवन ऊंचा उठता है। मुनि श्री ने नई पीढ़ी को दोष देने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें पहले अपनी प्राथमिकताएं और आचरण देखना चाहिए। मोबाइल की लत, दोहरे मापदंड और सुविधाओं की अधिकता बच्चों को कमजोर बना रही है। उन्होंने कहा कि “कठनाइयों का सामना करने वाला मनुष्य ही मजबूत बनता है” और गुरुदेव का संदेश दोहराया— “गमले का पौधा मत बनो, जंगल का बरगद बनो।” संयुक्त परिवार की परंपरा, माता-पिता के प्रति कृतज्ञता और प्रतिदिन चरण वंदना को संस्कारों की नींव बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि “पीढ़ियाँ वही दोहराती हैं, जो आप उन्हें सिखाते हो।” उन्होंने विदेश में रह रहे एक उद्योगपति का उदाहरण देकर भारतीय संस्कृति की महत्ता बताई। प्रवचन सभा का शुभारंभ आचार्य गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। विशिष्ट अतिथियों ने पाद प्रक्षालन किया एवं पुण्यार्जकों ने शास्त्र भेंट किए। सभा में मुनि श्री संधानसागर महाराज एवं समस्त क्षुल्लक गण की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र. अभय आदित्य ने किया।
