मैहर : जिले के रामनगर क्षेत्र में शनिवार को अनुसूचित जनजाति यानी गोंड़ समाज के लोगों ने अपनी जमीनों पर हुए कथित अवैध कब्जे के खिलाफ एक बेहद अनोखा और उग्र प्रदर्शन किया . जगनगरा और पोड़िया गांव के सैकड़ों आदिवासियों ने अपने मुंह में चारा दबाकर प्रशासन के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीनों पर रसूखदारों द्वारा जबरन कब्जा कर लिया गया है, जिसके कारण वे अपने ही क्षेत्र में भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गए हैं. उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद गोंड़ समाज के प्रतिनिधियों ने रामनगर एसडीएम एसपी मिश्रा को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है.
इस पूरे मामले में प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष पर लगभग 39 एकड़ भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है. आदिवासियों का कहना है कि गोंड़ समाज की इस बेशकीमती भूमि को पहले नियमों को ताक पर रखकर अन्य लोगों के नामों पर दर्ज किया गया और बाद में सुनियोजित तरीके से इसे दूसरे लोगों को हस्तांतरित कर दिया गया. मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे खेल में लगभग 50 आदिवासियों की पट्टे की जमीन को पहले एक-एक करके जगदीश गोंड नामक व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कराया गया, और इसके बाद इस पूरी 39 एकड़ जमीन को पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष को सौंप दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इतनी बड़ी जमीन एक ही व्यक्ति के जरिए पूर्व अध्यक्ष के पास कैसे पहुंच गई.
यह मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक तूल पकड़ चुका है, जिसके चलते क्षेत्र के आदिवासियों के समर्थन में उतरते हुए कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह ने इस मुद्दे को सीधे विधानसभा में उठाया है. उन्होंने सरकार और प्रशासन को घेरते हुए तीखा सवाल किया कि आखिर कड़े कानूनों के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर कोई भी आदिवासी कैसे भूमिहीन हो सकता है.वही जब इस मामले में जब एसडीएम तहसीलदार से संपर्क करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो सका.
इनका कहना
मुख्यमंत्री जी इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएँ और आदिवासियों की जमीन उन्हें वापस दिलाई जाएँ.
आदिवासियों के अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता स्वीकार नहीं होगा।
मैहर के रामनगर में आदिवासी भाइयों-बहनों को अपनी ही जमीन के लिए मुँह में चारा दबाकर प्रदर्शन करना पड़े, इससे बड़ी विफलता भाजपा सरकार की क्या हो सकती है?
उमंग सिंगार
नेता प्रतिपक्ष
पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष ने आदिवासियों की जमीन कब्जाई है इसमें शासन प्रशासन भी शामिल है इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए दोषियों पर कार्रवाई हो.
दीपू मिश्रा
कांग्रेस नेता
