अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध भीषण हो गया है। ईरान ने कतर, ओमान और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें बरसाई हैं, जबकि अमेरिका ने ईरान के मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया है।
मिडिल ईस्ट में तनाव अब एक पूर्ण युद्ध के रूप में तब्दील होता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान ने एक बार फिर एक-दूसरे पर मिसाइलों और ड्रोन्स की बौछार कर दी है। रविवार से शुरू हुए इस नए दौर के हमलों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान को ‘बुरी तरह पीट रही है।’
ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी एयर स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए मिडिल-ईस्ट के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट और आत्मघाती ड्रोन से हमला किया है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उसने कतर में स्थित जेट मेंटेनेंस सेंटर, ओमान में एयरक्राफ्ट कैरियर सपोर्ट प्लेटफॉर्म और कुवैत में ‘हिमार्स’ मिसाइल लॉन्चर सिस्टम को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है।
इसके अलावा, जॉर्डन में अमेरिकी कमांड सेंटर पर भी हमले की खबर है। कतर ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल का मलबा गिरने से एक बच्चे सहित तीन लोग घायल हुए हैं और इसके लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।
अमेरिका की भीषण एयर स्ट्राइक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, रविवार से ईरान के खिलाफ हवाई हमलों की एक नई श्रृंखला शुरू की गई है। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के मिसाइल सिस्टम, हवाई रक्षा ठिकानों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की तेज रफ्तार स्पीडबोट्स को नष्ट करना है।
अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान की एक क्रूज मिसाइल और एक आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही मार गिराने में सफलता हासिल की है। बंदर अब्बास, केश्म द्वीप, जास्क और बुशहर जैसे इलाकों में भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।
स्ट्रैट ऑफ होर्मुज बना जंग का अखाड़ा
इस पूरी लड़ाई का केंद्र एक बार फिर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज‘ बन गया है। ईरान की ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रैट अथॉरिटी’ ने घोषणा की है कि क्षेत्र में अमेरिकी सेना की अवैध गतिविधियों के कारण अब किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हालांकि, अमेरिका ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस जलमार्ग पर ईरान का कोई नियंत्रण नहीं है और अमेरिकी सेना नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए मुस्तैद है।
जान-माल का नुकसान
ईरानी मीडिया के अनुसार, होर्मोज्गान में हुए अमेरिकी हमलों में एक मेंटेनेंस कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि मशहर में एक वॉटर पंपिंग स्टेशन पर हुए हमले में भी एक व्यक्ति ने जान गंवाई है। वहीं कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उनके तीन उत्तरी सीमा चौकियों और एक तेल ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को नुकसान पहुंचा है।
इस बीच, ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को ‘आक्रामक’ बताते हुए इनकी कड़ी निंदा की है और आरोप लगाया है कि अमेरिकी दबाव के कारण ओमान के साथ चल रही समुद्री सुरक्षा वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
