पौधों का संरक्षण और उन्हें विकसित करना वास्तविक जिम्मेदारी: विजेंद्र गुप्ता

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (वार्ता) दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और उन्हें विकसित करना वास्तविक जिम्मेदारी है।
श्री गुप्ता ने रोहिणी सेक्टर-14 स्थित चित्रगुप्त पार्क में मेगा वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा “केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और उन्हें विकसित करना हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है। किसी भी वृक्षारोपण अभियान की सफलता लगाये गये पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहकर वृक्ष बनने से मापी जानी चाहिए।” उन्होंने कहा कि निरंतर जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के कारण रोहिणी आज दिल्ली के सबसे हरित क्षेत्रों में शामिल हो चुकी है।

यह अभियान केवल पार्कों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक घर और मोहल्ले तक पहुंचकर जन आंदोलन का रूप लेना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपने क्षेत्रों में भी वृक्षारोपण अभियान चलाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नीम और जामुन जैसे देशी वृक्ष स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे उपयुक्त हैं और इनका बड़े पैमाने पर रोपण किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी वृक्षारोपण के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि पौधों को जीवित रखकर उन्हें स्वस्थ वृक्ष के रूप में विकसित करना ही सबसे बड़ी सेवा है।

विधानसभा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रव्यापी अभियान “एक पेड़ माँ के नाम” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल प्रत्येक नागरिक को अपनी माता के सम्मान में एक वृक्ष लगाने और उसकी देखभाल करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि ऐसा वृक्ष प्रेम, कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण का स्थायी प्रतीक बन जाता है। अपने हालिया लद्दाख दौरे का जिक्र करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि वहां सीमित हरियाली को देखकर उन्हें वृक्षों के महत्व का गहरा एहसास हुआ।

उन्होंने कहा कि कठोर जलवायु वाले क्षेत्रों में हरियाली का महत्व और अधिक समझ में आता है, इसलिए दिल्ली जैसे महानगर में हरित क्षेत्र का संरक्षण और विस्तार पर्यावरणीय गुणवत्ता तथा जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। रोहिणी के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1997 में पहली बार विधायक बनने के समय क्षेत्र में पर्याप्त वृक्ष नहीं थे, लेकिन लगातार प्रयासों और वृक्षारोपण अभियानों के कारण आज रोहिणी शहरी हरित विकास का उदाहरण बन चुकी है। उन्होंने परिपक्व वृक्षों के वैज्ञानिक प्रबंधन और नियमित छंटाई की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बना रहे।

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