हैदराबाद 11 जुलाई (वार्ता) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘विकसित भारत 2047’ में तकनीक की भूमिका को अहम बताते हुए कृत्रितम बुद्धिमता (एआई) के युग में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग से बदलते माहौल के हिसाब से पाठ्यक्रम में बदलाव करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों की मदद करने का आह्वान किया। तेलंगाना के एक दिवसीय दौरे पर यहां पहुंचे श्री वैष्णव ने शनिवार को हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसआईसीसी) में ‘विकसित भारत 2047’ बनाने में तकनीक की भूमिका पर आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान आईटी उद्योग से जुड़े लोगों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि तकनीक तेज़ी से बदल रही है और एआई वैश्विक आईटी उद्योग को बदल रहा है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों के लिए लगातार सीखने, नवाचार और नयी स्थितियों के अनुसार ढलने की ज़रूरत है। उन्होंने आईटी उद्योग से आग्रह किया कि वे अगली पीढ़ी के तकनकी समाधान विकसित करके और वैश्विक तकनीक का नेतृत्वकर्ता के तौर पर भारत की स्थिति को मज़बूत करके इस मौके का पूरा फ़ायदा उठाएं। इस दौरान उन्होंने आईटी उद्योग से जुड़े लोगों को आश्वासन दिया कि देश की कंप्यूटर क्षमता बढ़ाई जाएगी क्योंकि यह समय की ज़रूरत है। केंद्रीय मंत्री ने आईटी उद्योग के नेताओं से आग्रह किया कि वे शिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी करें और उद्योग की ज़रूरतों के हिसाब से उनके पाठ्यक्रम को अपडेट करने में मदद करें।
उन्होंने गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) का उदाहरण देते हुए कहा कि एयरबस के साथ मिलकर जीएसवी अपने पाठ्यक्रम को उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार बनाया और अब एयरबस वहाँ से इंजीनियरों को नौकरी पर रख रही है। इस दौरान आईटी उद्योग से जुड़े लोगों ने भारतीय शिक्षण संस्थानों में सेक्टर-स्पेसिफिक डेटा ट्रस्ट बनाने का सुझाव दिया। इस सुझाव का स्वागत करते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि उद्योगों के साथ मिलकर यहां स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद में एक पायलट प्रोजेक्ट (शुरुआती परियोजना) शुरू किया जा सकता है। इस पहल के तहत, डेटा ट्रस्ट खास सेक्टर के लिए भारतीय डेटासेट को सुरक्षित रूप से होस्ट करेंगे। इसके लिए उचित इस्तेमाल की नीतियां बनाई जाएंगी ताकि स्टार्टअप, अनुसंधानकर्ता और कंपनियां ज़िम्मेदारी से डेटा का इस्तेमाल कर सकें।
सेमीकंडक्टर पारिस्थितिक तंत्र को मज़बूत करने के सरकार के प्रयासों पर ज़ोर देते हुए श्री वैष्णव कहा कि देश भर के 315 विश्वविद्यालयों को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल से लैस किया गया है। ये टूल विद्यार्थियों को उद्योग मानक प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन करने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि इन चिप डिज़ाइनों को पंजाब के मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (एससीएल ) में बनाया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को चिप डिज़ाइन से लेकर निर्माण और परीक्षण तक का प्रायोगिक अनुभव मिलता है। श्री वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की ज़बरदस्त विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का उत्पादन 13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है और यह डबल-डिजिट चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन गया है, जबकि मोबाइल फ़ोन अब देश का सबसे बड़ा व्यक्तिगत निर्यात उत्पाद है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां एक भरोसेमंद वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी केंद्र के तौर पर भारत के उभरने को प्रदर्शित करकी हैं। इस संगोष्ठी में श्री वैष्णव के साथ केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी भी शामिल हुए।

