भारतीय ज्ञान परंपरा ही पर्यावरण संकट का स्थायी समाधान : डॉ. अतुल कोठारी

जबलपुर। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, महाकौशल प्रांत एवं रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में श्री राम ग्रुप में “पर्यावरण संरक्षण में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं, शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन दर्शन में निहित है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी अभियान से अधिक जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए और इसकी शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से करनी होगी। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे प्रयास समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय ज्ञान प्रणाली को अपनाने और व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।

संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सह-संयोजक संजय स्वामी ने कहा की पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। भारतीय संस्कृति प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देती है, जिसे जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेश वर्मा ने मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए सभी प्रतिभागियों को अपनी मातृभाषा में हस्ताक्षर करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के व्यापक उपयोग से ही ज्ञान का लोकतंत्रीकरण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा साकार होगी।

संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग, भारतीय कृषि परंपरा, पंचमहाभूत की अवधारणा और सतत विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित सिद्धांत वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में अत्यंत प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम में श्री राम ग्रुप के संचालक आर.के. करसोलिया, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलगुरु डॉ. राजेंद्र कुरारिया, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, सागर के कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. अल्केश चतुर्वेदी सहित अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे। स्वागत भाषण डॉ. पटेल ने दिया, जबकि आभार डॉ. योगेश मोहन दुबे ने व्यक्त किया। संगोष्ठी में डॉ. अशोक खंडेलवाल, डॉ. पवन तिवारी, डॉ. एस.एस. संधू, डॉ. राकेश बाजपेयी, डॉ. आशुतोष दुबे सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी शामिल हुए।

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