
शाजापुर, आगर जिले के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ और अवैध वसूली का मामला उजागर हुआ है. मंदिर परिसर के भीतर गैर सरकारी समिति बनाकर खुलेआम सोने-चांदी के आभूषण और नगदी का दान लिया जा रहा था. बड़ी बात तो यह है कि ये पूरा खेल अधिकृत सरकारी प्रबंध समिति को किनारे कर किया जा रहा था. पूर्व एसडीएम की शह पर 2024 में यह अवैध व्यवस्था शुरू की गई थी. अब इस मामले में आगर कलेक्टर ने जांच के आदेश देकर 7 दिन में रिपोर्ट तलब की है.
गौर करने वाली बात यह है कि विश्व प्रसिद्ध नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर में सरकारी समिति को दरकिनार कर 2024 में नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति का गठन किया गया, इस संस्था को तत्कालीन एसडीएम मिलिंद ढोके के संरक्षण में मंदिर के गर्भगृह के भीतर पैर जमाने का मौका मिला. बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के मंदिर के अंदर रसीद कट्टे फाड़े जा रहे थे. जिसमें रजत सौंदर्यीकरण हेतु दान पत्र के नाम पर रसीद बुक छपाकर अवैध वसूली की जा रही थी. रसीद पर बकायदा निजी बैंक का नंबर अंकित था. जबकि सरकारी समिति को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था. मां बगलामुखी मंदिर पूरी तरह शासन के नियंत्रण में है और इसकी व्यवस्था संभालने के लिए स्थानीय एसडीएम प्रबंध समिति के अध्यक्ष होते हैं. लेकिन इस सरकारी समिति को दरकिनार कर गैर सरकारी निजी समिति द्वारा खुलेआम सोने-चांदी के आभूषण और दान की अवैध वसूली की जा रही थी.
कलेक्टर ने बनाई जांच समिति
आगर कलेक्टर प्रीति यादव द्वारा मां बगलामुखी मंदिर में गैर शासकीय समिति द्वारा अवैध वसूली के मामले में एक जांच समिति गठित की है. यह समिति सात दिन के अंदर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. इस समिति में जिला पंचायत सीईओ, नलखेड़ा सीएमओ, जिला कोषालय अधिकारी को सदस्य बनाया गया है. जो गैर शासकीय समिति द्वारा की गई अवैध वसूली के मामले में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी.
किसने बनाई नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति
मां बगलामुखी मंदिर में नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति के नाम पर रजत सौंदर्यीकरण हेतु दान पत्र की अवैध वसूली की जा रही थी. यह पूरी तरह गैर सरकारी थी. आखिर इस समिति को बनाने वाला मास्टर माइंड कौन था. इस समिति का एकाउंट मप्र ग्रामीण बैंक नलखेड़ा में एकाउंट नंबर 01411102100000110 है. जिसमें अवैध रूप से दान लिया जा रहा था. रसीद कट्टे में समिति के तथाकथित मोबाइल नंबर भी अंकित है. अब देखना है कि जांच के बाद इनके मास्टर माइंड के नाम उजागर होते हैं या नहीं.
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