15 एकड़ जमीन लेकर बेटों ने मां को किया बेघर, 95 वर्ष की उम्र में व्हीलचेयर पर न्याय मांगने पहुंची मां

सीहोर। मां अपने बच्चों को पालने-पोसने और उनका भविष्य संवारने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा देती है, लेकिन जब वही बच्चे बड़े होकर मां की लाठी बनने के बजाय उसकी लाचारी का फायदा उठाने लगें तो ऐसे रिश्तों पर सवाल उठना स्वभाविक है. ऐसा ही दिल दुखाने वाला मामला रेहटी क्षेत्र के ग्राम मोगरा से सामने आया है.

यहां की 95 वर्षीय बुजुर्ग मां वक्ता बाई को अपने ही खून से ऐसा धोखा मिला कि इस उम्र में उन्हें न्याय के लिए व्हीलचेयर पर बैठकर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में गुहार लगानी पड़ी. बुजुर्ग महिला वक्ता बाई ने जनसुनवाई में अतिरिक्त कलेक्टर को आपबीती सुनाते हुए कहा कि पति की मौत के बाद उन्होंने अपने तीनों बेटों पर भरोसा करके अपनी 15 एकड़ उपजाऊ और कीमती जमीन तीनों में बराबर-बराबर बांट दी. जमीन की रजिस्ट्री कराते समय कलयुगी बेटों ने बड़े-बड़े वादे किए थे। उन्होंने मां को भरोसा दिलाया था कि वे जीवनभर उनकी सेवा करेंगे और हर महीने खर्चे के लिए 10-10 हजार रुपये कुल 30 हजार रुपये भरण पोषण के तौर पर देंगे. बुजुर्ग मां का आरोप है किजमीन कानूनी रूप से अपने नाम होते ही उनके तेवर बदल गए. बेटों ने बूढ़ी मां को न सिर्फ पैसे देना बंद कर दिया, बल्कि उनकी सुध लेना भी छोड़ दिया. आज 95 साल की उम्र में रोटी और दवाई जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है. बुजुर्ग मां ने अब प्रशासन से अपनी जमीन वापस मांगी है. उन्होंने रोते हुए कहा जब मेरे बेटे ही मेरे नहीं रहे तो मेरी जमीन पर उनका कोई हक नहीं होना चाहिए. प्रशासन उनसे मेरी जमीन वापस दिलाए.

 

 

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