मूंग उपार्जन: गिरदावरी में देरी और सीमित खरीदी से नुकसार झेलने मजबूर किसान

जबलपुर: शासन द्वारा जिले के लिए मूंग की उत्पादकता 5.81 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित किए जाने और उसी का 25 प्रतिशत यानी 1.45 से 1.48 क्विंटल प्रति एकड़ ही समर्थन मूल्य पर खरीदी की घोषणा से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारत कृषक समाज ने आरोप लगाया है कि यदि शासन द्वारा निर्धारित उत्पादकता को ही आधार माना जाए तो किसान को शेष 4.50 क्विंटल मूंग मंडी में बेचनी पड़ेगी, जहां वर्तमान में औसत मॉडल भाव लगभग 6500 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि समर्थन मूल्य 8768 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। इस स्थिति में किसानों को 2200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक का नुकसान हो रहा है। संगठन के अनुसार केवल शेष 4.50 क्विंटल उपज पर ही किसान को लगभग 11,250 रुपये प्रति एकड़ का घाटा उठाना पड़ रहा है।

संगठन ने बताया कि मूंग पंजीयन की अंतिम तिथि 15 जून 2026 थी। अंतिम तिथि तक जबलपुर जिले में केवल 8500 किसानों का पंजीयन हो सका, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधा है। संगठन के अनुसार जबलपुर जिले के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्वयं स्वीकार किया है कि इस वर्ष लगभग आधे क्षेत्र में ही मूंग की गिरदावरी हो सकी थी तथा अंतिम तिथि तक आधी गिरदावरी शेष थी। समय पर गिरदावरी नहीं होने के कारण हजारों किसान पंजीयन से वंचित रह गए। जबकि जिले में इस वर्ष लगभग 53 हजार एकड़ में मूंग की बोनी हुई है। भारत कृषक समाज ने सवाल उठाया है कि पंजीयन से वंचित किसानों तथा शेष उपज मंडी में कम दाम पर बेचने को मजबूर किसानों के नुकसान का जिम्मेदार कौन है और इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
10 केन्द्र निर्धारित, खरीदी शुरू नहीं
संगठन ने यह भी बताया कि मूंग खरीदी की शुरुआत 1 जुलाई से होनी थी। जबलपुर जिले में 10 खरीदी केंद्र निर्धारित किए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी भी केंद्र पर खरीदी प्रारंभ नहीं हुई है। इससे किसान मजबूरी में अपनी उपज कम दाम पर मंडियों में बेच रहे हैं। भारत कृषक समाज के इंजी. के. के. अग्रवाल, जे. आर. गायकवाड़, रूपेंद्र पटेल, सुभाष चंद्रा, प्रमोद मरवाहा, रामगोपाल पटेल, रामकिशन पटेल, अविनाश राय, सी. एल. शर्मा, ठाकुर हरनारायण सिंह, डॉ. प्रकाश दुबे, समेत अन्य पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो किसान खरीफ की बोनी छोडक़र आंदोलन और संघर्ष के लिए सडक़ पर उतरने को मजबूर होंगे।

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