पिछले पांच वर्षों में आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम तथा प्रतिस्पर्धी बनी है सहकारी व्यवस्था : शाह

नयी दिल्ली 06 जुलाई (वार्ता) केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान और विकास का व्यापक रोडमैप तैयार कर सहकारी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम तथा प्रतिस्पर्धी बनाया है।

श्री शाह ने आज यहां सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों से सहकारिता से जुड़े 30 करोड़ लोगों को नयी ऊर्जा मिली है। सहकारी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम तथा प्रतिस्पर्धी बनाया है। जब देश 2047 में आज़ादी के सौ वर्ष मनाएगा, तब सहकारिता आंदोलन ‘समृद्ध भारत’ की मजबूत नींव होगा।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने कृषि, डेयरी, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों को जोड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नयी सहकारी संस्थाओं का नेटवर्क बना, 32 करोड़ से अधिक सदस्यों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है। साथ ही नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समिति बनाकर गांवों के स्तर तक सहकारिता को एक माला में पिरोया है। आने वाले 10 वर्षों में ये अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी सहकारी संस्था बनेंगी।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों के उत्पादों को गांव से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और भारत को बीज उत्पादन में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। भारत बीज सहकारी समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी बीज उत्पादन कंपनी बनेगी और हर राज्य में नई इकाई से किसानों को शुद्ध और उन्नत बीज दिये जायेंगे।

श्री शाह ने कहा कि जैविक खेती, पुर्नचक्रण पर आधारित अर्थव्यवस्था , गोबर प्रबंधन, जैविक खाद और ऊर्जा उत्पादन को सहकारिता मॉडल से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को को भी नयी गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से हर क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर तैयार किये जा रहे हैं जिससे प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स) से लेकर शीर्ष समिति (एपेक्स) तक पेशेवर कौशल , पारदर्शिता तथा कार्यकुशलता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार भी समाप्त होगा।

उन्होंने कहा कि 3,000 करोड़ की लागत से पैक्स के कंप्यूटरीकरण का कार्य, 39,000 किसान समृद्धि केंद्र और 639 जन औषधि केंद्र संचालित किये जा रहे हैं। सहकारी बैंकों में डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा और ई-केवाईसी लागू होने से जिला सहकारी बैंकों का कारोबार 19.6 लाख करोड़ से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने सहकारिता क्षेत्र में 70,000 करोड़ रुपये का नया निवेश किय है जिससे सहकारी संस्थाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण को नई गति मिली है।

इस अवसर पर केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और सहकारिता मंत्रालय में सचिव डॉ. आशीष भूटानी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव आतिश चंद्र, पशुपालन और डेयरी विभाग सचिव नरेश पाल गंगवार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं, सहकारी महासंघों, सहकारी बैंकों, डेयरी सहकारी समितियों, भारत टैक्सी, पैक्स और सहकारिता क्षेत्र के अन्य हितधारकों ने भी भाग लिया।

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