ग्वालियर: मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के 18 जुलाई को होने वाले चुनाव में प्रचार अब पूरी तरह चरम पर पहुंच चुका है। अध्यक्ष पद सहित विभिन्न पदों के प्रत्याशी लगातार बैठकों, जनसंपर्क और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से सदस्यों का समर्थन जुटाने में जुटे हैं। अपने-अपने कार्यकाल, संघर्ष और व्यापारिक हितों के लिए किए गए कार्यों का बखान कर मतदाताओं को साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
इसी बीच कुछ हाउस पैनल के प्रत्याशी एक बार फिर अपनी बयानबाजी को लेकर व्यापारिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में अध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी ने एक व्यापारिक समूह की बैठक में वर्षों पुराने एक मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि दाल बाजार के एक व्यापारी को चोरी की शक्कर खरीदने के मामले में पुलिस पूछताछ के लिए ले जा रही थी, तब उन्होंने हस्तक्षेप कर उसे पुलिस के चंगुल से छुड़ाया था।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस व्यापारी को पुलिस द्वारा पकड़े जाने की बात की जा रही थी, बैठक में उस व्यापारी के करीबी रिश्तेदार भी मौजूद थे। इस बयान के बाद व्यापारिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वजह यह है कि जिस व्यापारी का अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र किया गया, वह वर्तमान में स्वयं चेंबर की कार्यकारिणी का चुनाव लड़ रहा है। ऐसे में चुनावी माहौल में इस तरह के पुराने घटनाक्रम का उल्लेख उसकी छवि पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
चुनाव में जहां एक ओर पारस जैन मिलनसार के साथ अपनी दबंग छवि और व्यापारियों के लिए संघर्ष करने की बात प्रमुखता से रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी प्रवीण अग्रवाल अपनी साफ-सुथरी, मिलनसार और मददगार छवि के कारण समर्थन जुटा रहे हैं।सूत्रों का कहना है कि चेंबर का यह चुनाव केवल दावों और उपलब्धियों का नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, विश्वसनीयता और संतुलित आचरण की भी परीक्षा माना जा रहा है। ऐसे में व्यापारियों का समर्थन हासिल करने के लिए की जा रही आक्रामक बयानबाजी कहीं उल्टा असर न डाल दे, इसे लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब देखना यह होगा कि मतदान तक चुनावी बयानबाजी किस करवट बैठती है और व्यापारियों का जनादेश किसके पक्ष में जाता है।
