रावलकोट, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तानी सरकार और सेना के दमनकारी रवैये के खिलाफ व्यापक जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है। रावलकोट में एडवोकेट मेहरा ख्वाजा और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में भारी संख्या में लोग एकत्रित हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना पर नागरिकों की हत्या, संसाधनों के दुरुपयोग और बुनियादी सुविधाओं को रोकने का गंभीर आरोप लगाया है। स्थानीय जनता अब सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद कर रही है।
पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मुहिम
प्रदर्शनकारी नेताओं ने न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी पाकिस्तान की इन हरकतों के खिलाफ हस्तक्षेप करने की अपील की है। सरदार अमन खान सहित अन्य नेताओं ने लद्दाख, कारगिल, गिलगित-बाल्टिस्तान और घाटी के निवासियों से एकजुट होने का आग्रह किया है। विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही हिंसा, इंटरनेट बंदी, आर्थिक नाकेबंदी और शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति को दबाने की कोशिशों को उजागर करना है।
मानवाधिकारों का उल्लंघन और चुनावी बॉयकॉट
एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने भी पीओजेके में पाकिस्तान के दमनकारी तरीकों और JAAC को प्रतिबंधित करने की कड़ी निंदा की है। बढ़ते तनाव और सेना की ड्रोन निगरानी के बीच, एक्टिविस्टों ने 27 जुलाई को होने वाले क्षेत्रीय चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करने का आह्वान किया है। नागरिकों का कहना है कि वे तब तक अपने शांतिपूर्ण आंदोलन को जारी रखेंगे जब तक कि उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं हो जातीं और उन पर हो रहे जुल्म बंद नहीं होते।

