नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद, भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुरक्षित है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने रविवार को पुष्टि की कि भारत के लिए कच्चा माल लेकर आ रहे 20 में से 15 महत्वपूर्ण जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इनमें 3.32 लाख टन यूरिया, 2.57 लाख टन डीएपी और 1.11 लाख टन सल्फर शामिल है। शेष जहाज भी निर्धारित समय पर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।
नए स्रोतों से सुदृढ़ हुई उपलब्धता
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से आपूर्ति के नए स्रोत तलाशे गए हैं, जिससे किसी भी तरह की कमी को रोका जा सका है। अब ओमान, रूस, मिस्र और अमेरिका सहित कई देशों से यूरिया और डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जानकारी दी कि पश्चिम एशिया संकट के कारण प्रभावित हुई प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अब पूरी तरह बहाल हो गई है, जिससे घरेलू उर्वरक संयंत्र अपनी पूर्ण क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं।
रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त भंडार
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में यूरिया और डीएपी के उत्पादन लक्ष्यों को पार कर लिया है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 197.56 लाख टन उर्वरक का भंडार पहले ही उपलब्ध हो चुका है, जो वार्षिक आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक है। सरकार ने दोहराया है कि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों के हितों की रक्षा करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और पर्याप्त घरेलू उत्पादन तथा आयात से उर्वरक की उपलब्धता संतोषजनक बनी रहेगी।

