डीएमएफ के 97 लाख में अनियमितता के आरोप

सिंगरौली । जिला खनिज प्रतिष्ठान मद से शासकीय महाविद्यालय बरका के लिए स्वीकृत 97.40 लाख रुपये की सामग्री खरीदी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शासकीय महाविद्यालय बरका के प्राचार्य ने अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा रीवा संभाग को विस्तृत शिकायत भेजकर खरीद प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितता, नियमों की अनदेखी और दस्तावेज छिपाने के आरोप लगाए हैं।

शिकायत में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय अग्रणी महाविद्यालय बैढ़न के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. एमयू सिद्दीकी की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायत के अनुसार जिला खनिज प्रतिष्ठान सिंगरौली द्वारा 15 अक्टूबर 2024 को जारी प्रशासकीय स्वीकृति आदेश के तहत बरका महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति को डीएमएफ मद से 97.40 लाख रुपये की सामग्री क्रय की स्वीकृति दी गई थी। प्रथम किस्त के रूप में 40 लाख रुपये भी स्वीकृत किए गए थे तथा बरका महाविद्यालय को ही क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया था। इसके बावजूद बिना किसी विधिवत आदेश के पूरी खरीद प्रक्रिया प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बैढ़न के माध्यम से संचालित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

40 लाख हस्तांतरण और खरीद प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

शिकायत में कहा गया है कि डॉ. एमयू सिद्दीकी ने बरका महाविद्यालय को बिना क्रय आदेश, बिना रेट सूची, बिना स्टॉक रजिस्टर, बिना बिल-वाउचर और अन्य आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराए सामग्री प्राप्त करने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं कई बार दस्तावेज मांगे जाने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। आरोप है कि खेल सामग्री आज तक प्राप्त नहीं हुई है, जबकि पुस्तके भी आवश्यकता और पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं भेजी गईं। ऐसे में उपलब्ध सामग्री का सत्यापन भी नहीं हो पा रहा है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 25 जनवरी 2025 को 40 लाख रुपये शासकीय अग्रणी महाविद्यालय बैढ़न के खाते में स्थानांतरित कर दिए गए। इसके साथ ही जेम पोर्टल के बीआईडी दस्तावेज में रिपोर्टिंग अधिकारी के रूप में गुलाम मोहिउद्दीन का नाम दर्ज होने पर भी आपत्ति जताई गई है। शिकायत के अनुसार उस समय उनकी पदस्थापना संजय गांधी महाविद्यालय, सीधी में थी, ऐसे में उनका नाम खरीद प्रक्रिया में दर्ज होना जांच का विषय बताया गया है।

बिना दस्तावेज सामग्री लेने का बनाया गया दबाव, आरोप

बरका महाविद्यालय ने अपने पत्र में कहा है कि जब क्रियान्वयन एजेंसी वही थी और उसे आहरण-संवितरण के अधिकार प्राप्त थे, तब आखिर किस परिस्थिति में पूरी खरीद प्रक्रिया अग्रणी महाविद्यालय बैढ़न द्वारा संचालित की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्टॉक रजिस्टर, तुलनात्मक चार्ट, निविदा दस्तावेज, गुणवत्ता समिति के आदेश, बिल, वाउचर और अन्य अभिलेख जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहराता जा रहा है। प्राचार्य ने अतिरिक्त संचालक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने, डीएमएफ मद से हुई खरीद की बिंदुवार जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद डीएमएफ मद से हुई खरीद और तत्कालीन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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