इंदौर: युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चोइथराम कॉलेज ऑफ नर्सिंग में नारकोटिक्स विंग, मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया. कार्यक्रम में 565 छात्र-छात्राओं और स्टाफ को नशे के सामाजिक, मानसिक और कानूनी दुष्परिणामों की जानकारी देकर नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया.
कार्यक्रम में नारकोटिक्स विंग के उप पुलिस अधीक्षक संतोष हाड़ा ने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को भी प्रभावित करती है. उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की. इस दौरान उपनिरीक्षक अजय कुमार शर्मा ने मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान और इसमें आम लोगों की भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया.
फार्मास्यूटिकल एक्सपर्ट अमित टेकर ने विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों के शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव, नशे की शुरुआती पहचान और इससे बचाव के उपायों की जानकारी दी. कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया.महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. श्रीजा विजयन ने कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि उनमें स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है. कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों और स्टाफ ने नशामुक्त जीवन अपनाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया.
जागरुकता ही बचाव है
नशे के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है, युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही नशामुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
संतोष हाड़ा, उप पुलिस अधीक्षक, नारकोटिक्स विंग, इंदौर
