इस्लामाबाद, सिंगापुर के पूर्व विदेश सचिव और राजदूत बिलहारी कौसिकन ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान की स्थिति पर कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की एकमात्र प्रासंगिकता उसके परमाणु हथियार हैं। कौसिकन के अनुसार, यदि पाकिस्तान के पास ये हथियार न होते, तो दुनिया उसके राजनीतिक या आर्थिक पतन की चिंता कभी नहीं करती, क्योंकि देश की वर्तमान स्थिति महज एक उपलब्धिहीन नाकामी की कहानी है।
कुप्रबंधन और विफल कूटनीति
पाकिस्तान द्वारा हाल के भू-राजनीतिक तनावों में ‘शांतिदूत’ बनने के दावों को राजदूत ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक दिखावे से आम नागरिकों का पेट नहीं भरता। कौसिकन ने पाकिस्तान की दुर्दशा का मुख्य कारण उसकी बुनियाद में मौजूद कुप्रबंधन, सेना का अत्यधिक हस्तक्षेप और जिहादी गुटों को प्रोत्साहन देना बताया। उन्होंने भूगोल को दोष देने की पाकिस्तानी प्रवृत्ति को भी महज एक बहाना करार दिया।
आर्थिक संकट की भयावह हकीकत
पूर्व राजदूत की आलोचना जुलाई 2026 के आंकड़ों से पूरी तरह मेल खाती है। वर्तमान में पाकिस्तान की महंगाई दर 12% तक पहुंच गई है और आर्थिक विकास दर मात्र 2.33% पर सिमट गई है। हाल ही में पेश किए गए $61 बिलियन के बजट ने आम जनता और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ को और बढ़ा दिया है। विदेशी निवेशकों के पलायन से मुल्क की आर्थिक स्थिति निरंतर गंभीर होती जा रही है।

