
प्रवेश कुमार मिश्र नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष की मौजूदगी में मंत्रिमंडल विस्तार व संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर महामंथन किया गया है. सूत्रों की माने तो लगभग ढाई घंटे तक चली इस बैठक के बाद यह तय हो गया है कि एक दो दिन के अंदर मंत्रिमंडल विस्तार और भाजपा अध्यक्ष की नई टीम की घोषणा हो जाएगी. सूत्र बता रहे हैं कि इस महा-मंथन का मुख्य एजेंडा केंद्रीय मंत्रिमंडल का संभावित विस्तार और पार्टी संगठन में खाली पड़े प्रमुख पदों को भरना है. हाल के दिनों में भाजपा के कई वरिष्ठ मंत्रियों और कद्दावर नेताओं को राज्यों में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिससे केंद्र और संगठन दोनों जगह कई अहम पद खाली हैं. आज की बैठक में इन पदों पर नए और युवा चेहरों को मौका देकर मिशन 2029 और आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करने का ब्लूप्रिंट फाइनल किया गया है.
जानकार बता रहे हैं कि जब भी अमित शाह के नेतृत्व में इस तरह की बैठक होती है उसके बाद अमित शाह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर बहुस्तरीय विमर्श के बारे में विस्तृत व समीक्षात्मक जानकारी देते हैं और उसके बाद प्रधानमंत्री अंतिम निर्णय कर लेते हैं. राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके तुरंत बाद सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े नीतिगत और ढांचागत बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है. सूत्र बता रहे हैं कि इस बैठक में किसी वरिष्ठ नेता को उपप्रधानमंत्री नियुक्त करने के राजनीतिक फायदों को लेकर भी चर्चा हुई है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से इस तरह की अटकलें लगाई जा रही है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या अमित शाह व राजनाथ सिंह में से किसी को उप प्रधानमंत्री की कुर्सी देकर सरकारी कार्यों को और सुव्यवस्थित करने का फैसला हो सकता है.
इतना ही नहीं चर्चा है कि 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात , पंजाब व हिमाचल समेत 7 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर यानी मिशन 2027 के लिए भी इस महामंथन में विस्तृत समीक्षा की गई है ताकि चुनावी राज्यों के राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए संगठन और सरकार में जिम्मेदारियों का आवंटन किया जा सके. सूत्र बता रहे हैं कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में विपक्षी दलों से पाला बदलकर आए सांसदों को मंत्री पद का इनाम दिया जाए या संगठन के पुराने वफादारों को तरजीह दी जाए, इस पेंच को सुलझाने के लिए इस बैठक में एक विशेष सोशल-इंजीनियरिंग फॉर्मूला तैयार किया गया है.
