सड़क एम्बुलेंस की सुरक्षा, सुविधाएं होंगी बेहतर, सरकार ने जारी किया एआईएस-125 में संशोधन का मसौदा

नयी दिल्ली, 2 जुलाई (वार्ता) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में सड़क एम्बुलेंस की सुरक्षा, कार्यक्षमता और चिकित्सीय सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस)-125 में संशोधन का मसौदा जारी कर दिया है जिसमें विशेष प्रकार की एम्बुलेंस, अनिवार्य बचाव उपकरण और ई-एम्बुलेंस के लिए विशेष पावर सोर्स जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।

मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक और बेहतर सुविधाओं वाली एम्बुलेंस की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, यदि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को दुर्घटना के पहले घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो लगभग 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है।

प्रस्तावित संशोधनों के तहत पहली बार नवजात शिशु सड़क एम्बुलेंस और मल्टी-स्ट्रेचर रोड एम्बुलेंस को मानकों में शामिल किया गया है। नवजात शिशु एम्बुलेंस समय से पहले जन्मे या गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए डिजाइन की जाएगी, जबकि मल्टी-स्ट्रेचर एम्बुलेंस एक साथ कई मरीजों को ले जाने में सक्षम होगी। मसौदे में यह भी प्रस्तावित है कि बी, सी और डी श्रेणी की सभी सड़क एम्बुलेंस में आपातकालीन बचाव उपकरण अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में क्षतिग्रस्त वाहनों से पीड़ितों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं एम्बुलेंस के बचाव कार्य में भी उनका उपयोग हो सके।

मंत्रालय के अनुसार ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ई-एम्बुलेंस में चिकित्सा उपकरणों के संचालन के लिए अलग विशेष पावर सोर्स उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही एआईएस-125 (भाग-2) में एम्बुलेंस में लगाए जाने वाले सभी चिकित्सीय उपकरणों के मानकों को भी स्पष्ट किया गया है।

आधिकारिक सूचना में बताया गया है कि मंत्रालय ने गत 14 मई को जारी मसौदा अधिसूचना जीएसआर 382(ई) के माध्यम से इन संशोधनों को सार्वजनिक सुझाव एवं टिप्पणियों के लिए मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया है। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी और निर्धारित तिथि से संशोधित मानक लागू होंगे।

 

 

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