भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला सुरक्षा, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर विकसित किए गए जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। बुधवार को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यूएन विमेन इंडिया ने महिला सुरक्षा को लेकर राज्य पुलिस की अभिनव पहलों की प्रशंसा की।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा के साथ महिला सुरक्षा, जेंडर समानता, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराधों की रोकथाम, नशा मुक्ति, बालिकाओं की सुरक्षा तथा पुलिस-समुदाय साझेदारी को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में यूएन विमेन इंडिया की डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह, स्टेट रिप्रेजेंटेटिव जोयात्री रे, पुलिस महानिदेशक के पीएसओ डॉ. विनीत कपूर तथा एसओ मलय जैन भी मौजूद रहे।
बैठक में पुलिस महानिदेशक ने मध्यप्रदेश पुलिस की प्रमुख पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि ऑपरेशन मुस्कान के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को खोजकर उनके परिजनों से मिलाने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। वहीं सृजन अभियान के जरिए बच्चों और बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण, जागरूकता और सशक्तिकरण से जोड़ने के साथ-साथ बाल विवाह, मानव तस्करी, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने प्रदेशव्यापी सेफ क्लिक 2.0 साइबर जागरूकता अभियान का भी उल्लेख किया, जिसके तहत स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से महिलाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान के माध्यम से युवाओं और समुदाय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर जनभागीदारी से नशामुक्त समाज बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
शोको इशिकावा ने महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता और शक्ति कैफे जैसी पुनर्वास आधारित पहलों की सराहना करते हुए इन्हें नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग का प्रभावी मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग को प्रशिक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, जिससे अधिक समावेशी, संवेदनशील और जनोन्मुखी पुलिस व्यवस्था विकसित की जा सके।
