टेस्ट कप्तानी मिलना ‘बड़ा सम्मान’ होगा : ब्रूक

चेस्टर-ली-स्ट्रीट, 01 जुलाई (वार्ता) हैरी ब्रूक ने कहा है कि इंग्लैंड की पुरुष टेस्ट टीम का नया कप्तान बनना उनके लिए बड़े सम्मान की बात होगी। यह बयान उन्होंने उस समय दिया, जब एक दिन पहले ही संन्यास लेने वाले बेन स्टोक्स ने उन्हें यह भूमिका संभालने के लिए अपना “100 प्रतिशत समर्थन” दिया था। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ तीसरे टेस्ट में सीरीज़ हार के दौरान स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा ने इंग्लैंड क्रिकेट में एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है।
पिछली एशेज़ से ही टेस्ट टीम के उपकप्तान रहे ब्रूक को स्टोक्स ने शनिवार शाम अपने फ़ैसले की जानकारी दी थी। जो रूट को भी उसी समय इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद रविवार सुबह चौथे दिन का खेल शुरू होने से पहले स्टोक्स ने ड्रेसिंग रूम में पूरी टीम को अपने निर्णय से अवगत कराया।

27 वर्षीय ब्रूक को न्यूज़ीलैंड सीरीज़ के दूसरे टेस्ट में कप्तानी का मौक़ा नहीं मिला था, जबकि स्टोक्स पहले टेस्ट के बाद एक विवादित नाइट आउट के चलते बाहर थे। उस दौरान स्टोक्स और गस एटकिंसन ने टीम का मध्यरात्रि कर्फ्यू तोड़ दिया था।
उस समय इंग्लैंड के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने कहा था कि ब्रूक का सिर्फ़ अपने क्रिकेट पर ध्यान देना बेहतर होगा। साथ ही यह भी माना गया कि कप्तानी मिलने पर उनसे असहज सवाल पूछे जा सकते थे, क्योंकि टीम में कर्फ्यू लागू करने की एक वजह पिछले एशेज़ दौरे से पहले वेलिंग्टन में एक बाउंसर के साथ ब्रूक की झड़प भी थी।

दूसरे टेस्ट में जो रूट ने अंतरिम कप्तानी की थी, लेकिन माना जा रहा है कि वे लंबे समय तक यह भूमिका निभाने के इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में स्टोक्स द्वारा ब्रूक का समर्थन करना आंशिक रूप से रूट की अनिच्छा से भी जुड़ा हो सकता है। इंग्लैंड अंडर 19 टीम की कप्तानी कर चुके ब्रूक पिछले साल से इंग्लैंड की सीमित ओवरों की टीमों की कमान संभाल रहे हैं। भारत के खिलाफ़ टी 20 सीरीज़ की पूर्व संध्या पर उन्होंने टेस्ट कप्तानी संभालने की इच्छा भी ज़ाहिर की। ब्रूक ने मंगलवार को कहा, “यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान होगा। टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड की कप्तानी करना हमारे खेल का सर्वोच्च स्तर है और एक विशेष उपलब्धि होगी।” ब्रूक ने कहा,”टेस्ट क्रिकेट खेलना मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। यह मेरा सपना रहा है और बचपन से मैं यही करना चाहता था। फैसला मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन अगर यह जिम्मेदारी मुझे मिलती है तो मैं खु़शी-खु़शी इसे स्वीकार करूंगा।”

साल 2009 में एंड्रयू स्ट्रॉस आख़िरी ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने एक साथ इंग्लैंड की तीनों प्रारूपों की कप्तानी की थी। हालांकि उस समय टी 20 क्रिकेट आज के समय के जितना बड़ा नहीं था। ब्रूक ने कहा, “मुझे लगता है कि यह संभव है। मैं यह नहीं कह रहा कि यह आसान होगा, लेकिन मुझे यकीन है कि ऐसा किया जा सकता है।” पिछले साल दिल्ली कैपिटल्स के साथ अपना आईपीएल अनुबंध छोड़ने के कारण उन्हें दो साल के आईपीएल प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि उन्होंने इंग्लैंड की सीमित ओवर फ़ॉर्मैट की कप्तानी संभालने को प्राथमिकता दी थी। “मैं फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट नहीं खेलता, इसलिए कैलेंडर में ऐसे दौर होते हैं जब मैं क्रिकेट नहीं खेल रहा होता। उस समय मैं अपनी फ़िटनेस पर काम कर सकता हूं और तीनों प्रारूपों के लिए तैयारी कर सकता हूं। चाहे मैं टेस्ट कप्तान बनूं या नहीं, मेरे लिए इंग्लैंड के लिए खेलना ही सबसे बड़ी बात है।” ब्रूक ने कहा कि उन्होंने खु़द को पूरी तरह इंग्लैंड क्रिकेट के लिए समर्पित कर दिया है। “मैंने तय किया है कि द हंड्रेड को छोड़कर कोई फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट नहीं खेलूंगा। मेरा पूरा ध्यान इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलने पर है। मैदान के अंदर और बाहर जो भी करता हूं, उसका मकसद इंग्लैंड के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है। यही वजह है कि मैं आईपीएल, पीएसएल या अन्य फ्रेंचाइज़ी लीग में नहीं खेलता।”

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