विन्ध्य की डायरी
डॉ रवि तिवारी
चुनावी सियासत की स्तब्धता के बीच कांग्रेस के विन्ध्य में कार्यकर्ता सम्मेलन के आयोजनों के अर्थ निकाले जाने लगे है. चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी की सर्वस्पर्शी रणनीति की शिकार कांग्रेस ने विन्ध्य में नए क्षत्रपों की तलाश के लिए पहली बार मुफीद कोशिश की है. समाजवादी से कांग्रेस में जुड़े और अब भाजपा के झंडे के तले डबल इंजन की गाड़ी की सवारी कर रहे कांग्रेस नेताओं को भी सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश देने की भी कोशिश की गई कि अब पार्टी में ऐसे लोगों की वापसी सम्भव नही है. राष्ट्रीय महासचिव से लेकर प्रदेश और विन्ध्य के सभी वरिष्ठ नेताओं की मंच में मौजूदगी संगठन की एकता के संकेत तो दे ही रही थी.
साथ ही यह भी जता रही थी कि पार्टी संगठन बड़े फेरबदल के लिए तैयार है. संगठन पदाधिकारियों को लेकर पुराना ढर्रा मंजूर नहीं है. जिम्मेदार की जवाबदेही तय कर अनुशासन की सख्ती का चाबुक अब सब पर कसा जाएगा. वर्षों से आकाओं की नजदीकियों के कारण पदाधिकारी होने के बाद भी सत्ता की कठपुतली बने नेताओ को अब पार्टी बर्दाश्त नही करेगी उन्हें बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है. नए प्रभावी लोगों को बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती. पार्टी में एकता, नेताओ की एकजुटता और कार्यकर्ताओं की ताकत समय आने पर उनकी और संगठन की तस्वीर बदल सकती है. विन्ध्य के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सत्ता को हिस्सा बने नेताओ को खुलकर मंच से चुनौती दी. जो आमतौर पर कम ही देखने को अभी तक मिलता था.
सदन में छलका विधायक का दर्द
मध्य प्रदेश में विधायको के बागी तेवर थम नही रहे है, सीधी से बीजेपी विधायक श्रीमती रीति पाठक ने सदन में अपनी ही सरकार को घेरा और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला को घेरते हुए उनके विभाग से जुड़े मुद्दो को उठाया है. विंध्य में बीजेपी विधायक एवं डिप्टी सीएम के बीच सियासी खीचतान बढ़ती जा रही है. इसके पूर्व सार्वजनिक मंच पर भी सवालो की बौछार कर चुकी है. बजट सत्र के आखिरी दिन में खराब स्वास्थ्य सेवाएं, डाक्टरो की कमी का मामला उठाया. सदन में विधायक का दर्द छलका, कहा कि रीवा में तो एयरपोर्ट खुल गया हमारे यहा अभी रेलवे स्टेशन तक नही है. हम लोग तो वैसे ही बेचारे बनकर बैठे है.
अब सवाल यह उठता है कि आप को विकास करने से किसने रोका, रीवा का एयरपोर्ट समूचे विंध्य के लिये है और जब उड़ान योजना में शामिल हुआ, उस समय रीती पाठक खुद सांसद थी. विकास के लिये इच्छा शक्ति होनी चाहिये. लगातार दस वर्ष तक सीधी से सांसद रही और केन्द्र में भाजपा की सरकार थी तो फिर सीधी के लिये प्रयास क्यो नही किया? सीधी में विकास की पर्याप्त संभावनाएं है, तो सांसद रहते हुए विकास के क्षेत्र में सीधी-सिंगरौली को ऊंचाई पर ले जा सकती थी. तो क्या यह माना जाय रीवा में हो रहे विकास से अन्य जनप्रतिनिधियो के पेट में दर्द हो रहा है या फिर विंध्य में क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई चल रही है. उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल की प्रबल इच्छा शक्ति ने विकास के कीर्तिमान स्थापित किये है और विकास उनका शौक भी है. यही इच्छा शक्ति जनप्रतिनिधियो में हो तो हर जिला रीवा के बराबर खड़ा हो सकता है.
कांग्रेस विधायक के बिगड़े बोल
कांग्रेस के विधायक ने मंच से साधु-संतो की तुलना सांड से की, जिसके बाद प्रदेश भर में विरोध शुरू हो गया. साधु-संतो ने इसे अपमान बताया. दरअसल विधानसभा उपाध्यक्ष रहे कांग्रेस के अमरपाटन विधायक राजेन्द्र सिंह ने सतना में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान साधु-संतो की तुलना सांड से कर दी. उन्होने कहा कि भाजपा ने इन्हे जनता के बीच हिंदुओ की बात करने के लिये छोड़ दिया है जो सांड की तरह दूसरो का खेत चरे जा रहे है. विधायक जी के बिगड़े बोल के बाद लोगो ने दुर्भाग्यपूर्ण और अशोभनीय बयान बताया. बढ़ते विवाद को लेकर विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि वह उन्हे कहा है जो भाजपा का नाम लेकर प्रचार करते है. साधु संत हमारे लिये पूज्यनीय है. कांग्रेस जब कार्यकर्ताओ को एकता के सूत्र में पिरोने में लगी है ऐसे समय में इस तरह के बयान से कांग्रेस की ही किरकिरी होती है. नेताओ को सोच समझ कर बोलना था
