सिंधु जल समझौता निलंबित होने के बाद पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के जरिए भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाने की तैयारी में है।
साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद भारत-पाकिस्तान के बीच के सिंधु जल बंटवारे से संबंधित संधि को भारत ने स्थगित कर दिया था। भारत के इस कदम से पाकिस्तानी हुकूमत बौखला गया है। पिछले एक साल से इस मामले पर पड़ोसी देश लगातार हाथ-पैर मार रहा है। भारत को तरह-तरह की धमकी भी देता रहा है। उसकी गीदड़भभकी का भारत पर कोई असर नहीं पड़ा। कोई सफलता न मिलने के बाद अब पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की तैयारी में है। इसके तहत इस्लामाबाद में मंगलवार को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने इस मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाएगा और अपने लिए समर्थन मांगेगा।
ये बड़े नेता होंगे शामिल
मीडिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान अपने यहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। इसके माध्यम से वो भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाकर अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा। सम्मेलन में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल असीम मुनीर समेत कई बड़े नौकरशाह, मिलिट्री के ऑफिसर और विदेशों के कई प्रवक्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है। इस सम्मेलन के जरिए पाक अपनी नई ‘वैश्विक जल कूटनीति रणनीति’ को पेश करेगा। पड़ोसी देश का उद्देश्य भारत के साथ दशकों पुराने सिंधु जल समझौते को दोबारा शुरू करने के लिए दुनिया से समर्थन जुटाना है।
क्या है कार्यक्रम का उद्देश्य?
खुफिया सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस सम्मेलन में पाकिस्तान द्वारा सिंधु जल समझौते पर सख्त रुख अपनाने की संभावना है। कार्यक्रम में पड़ोसी देश भारत की संभावित कूटनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाओं, जल नीति, दोनों देशों के बीच के विवाद के लिए उपयुक्त समाधानों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
बता दें, दोनों देशों के बीच अप्रैल, 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सिंधु जल समझौता निलंबित निलंबित चल रहा है। भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को कई बार वैश्विक मंचों पर उठा चुका है। अब एक बार फिर पाक इस मुद्दे को उठाने की मुहिम में जुट गया है। कार्यक्रम में पाकिस्तान द्वारा भारत पर पानी रोकने और जल आतंकवाद की रणनीति का भी आरोप लगा सकता है।
यह है पाकिस्तान की असल रणनीति
विशेषज्ञों की मानें तो, सम्मेलन के माध्यम से पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते पर भारत के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय समर्थन तैयार करना चाहता है। इसी के तहत पाकिस्तान पाकिस्तान आने वाले समय में संयुक्त राष्ट्र समेत कई अन्य वैश्विक मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाएगा। इस्लामाबाद का कहना है कि सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है। देश की करीब आधी आबादी कृषि कार्यों से संबंधित है। ऐसे में यह समझौता उसके लिए व्यापक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
पाक की सोची समझी कोशिश
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की यह संयुक्त पहल एक सोची-समझी रणनीति लगती है। इसके जरिए पाकिस्तान में सैन्य नेतृत्व और नागरिकों की एकजुटता का संकेत दिया जाएगा। आंतरिक स्तर बलूचिस्तान, पीओके जैसे कई मोर्चों पर घिरे पाकिस्तान इसी बहाने लोगों का ध्यान भटकाना चाहता है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में पेश रहा है।
